वाराणसी । गुरुवार को अंतर विश्वविद्यालय अध्यापक शिक्षा केंद्र (आईयूसीटीई) में दो दिवसीय *“रिफ़ॉर्म्युलेटिंग पेडागॉजी फ़ॉर हायर एजुकेशन इंस्टिट्यूशन्स (एच ई आईएस): क्रिटिकल, सस्टेनेबल, एंड ह्यूमन-सेंटर्ड टीचिंग-लर्निंग फ़्रेमवर्क्स”* अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला का समापन आई.यू.सी.टी.ई. परिसर, वाराणसी में हुआ।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रो. एमिली पुइग ई वलारो, प्रोफ़ेसर, डिपार्टमेंट ऑफ़ पेडागॉजी, यूनिवर्सिटी ऑफ़ गिरोना, स्पेन रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रो. आशीष श्रीवास्तव, डीन (शैक्षणिक एवं अनुसंधान) आईयूसीटीई, वाराणसी ने की।

मुख्य अतिथि प्रो. एमिली पुइग ई वलारो, प्रोफ़ेसर, डिपार्टमेंट ऑफ़ पेडागॉजी, यूनिवर्सिटी ऑफ़ गिरोना, स्पेन ने अपने उद्बोधन में दार्शनिक जिद्दू कृष्णमूर्ति के कथन *“शिक्षा जीवन के बारे में सीखना है”* को उद्धृत करते हुए शिक्षा के वास्तविक उद्देश्य पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल ज्ञानार्जन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जीवन को समझने और जीने की कला है। साथ ही, उन्होंने कहा कि वे स्वयं भी भारतीय शिक्षा की अवधारणा, संस्कृति और परंपरा के बारे में सीख रहे हैं। अध्यक्षीय उद्बोधन में प्रो. आशीष श्रीवास्तव, डीन (शैक्षणिक एवं अनुसंधान) आईयूसीटीई ने सभी प्रतिभागियों के प्रति हार्दिक धन्यवाद ज्ञापित किया। अपने वक्तव्य में उन्होंने पेडागॉजी, एन्ड्रागॉजी, ह्यूटागॉजी, और पीरागॉजी के महत्व और आपसी संबंधों को स्पष्ट किया। साथ ही, उन्होंने कहा कि इन सभी दृष्टिकोणों का समन्वय ही शिक्षा को समग्र और प्रभावी बनाता है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि आज के समय में केवल सुधार पर्याप्त नहीं है, बल्कि शिक्षण-पद्धति को नए संदर्भों और ज़िम्मेदारियों के अनुरूप पुनः संयोजित करना आवश्यक है। पेडागॉजी का पुनर्गठन ही उच्च शिक्षा को मानवीय, प्रासंगिक और समयानुकूल बनाने का मार्ग प्रशस्त करता है।

सभी प्रतिभागी समूहों ने अपने-अपने विचार प्रस्तुत किए और सामूहिक चर्चा के माध्यम से शिक्षण-पद्धति के पुनर्गठन की आवश्यकता को समझने का प्रयास किया। इस संवाद में विभिन्न दृष्टिकोण सामने आए, जिनसे स्पष्ट हुआ कि शिक्षा को समयानुकूल बनाने के लिए पेडागॉजी में सुधार और पुनः संयोजन अनिवार्य है। इस कार्यक्रम का समन्वयन एवं धन्यवाद ज्ञापन डॉ. ज्ञानेंद्र सिंह, सहायक आचार्य, आईयूसीटीई द्वारा किया गया। इस अवसर पर प्रमुख शिक्षाविद्, शोध छात्र, तथा केंद्र के अन्य समस्त संकाय सदस्य उपस्थित रहे।

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