प्रेमचंद की ‘नरक का मार्ग’ ने विवाह में समानता और सम्मान का दिया संदेश

वाराणसी। प्रेमचंद मार्गदर्शन केंद्र लमही द्वारा आयोजित ‘सुनों मैं प्रेमचंद’ कार्यक्रम के 1959वें दिवस पर महान कथाकार प्रेमचंद की प्रसिद्ध कहानी ‘नरक का मार्ग’ का पाठ वरिष्ठ कवि विजय चंद्र त्रिपाठी ने किया। इस अवसर पर संरक्षक प्रोफेसर श्रद्धानंद, श्रीप्रकाश श्रीवास्तव एवं निदेशक राजीव गोंड ने उनका सम्मान किया। कहानी की समीक्षा करते हुए प्रो श्रद्धानंद ने कहा कि प्रेमचंद की यह कहानी भारतीय समाज की उस वास्तविकता को उजागर करती है, जहाँ महिलाओं की इच्छाओं और भावनाओं की उपेक्षा की जाती थी। उन्होंने कहा कि विवाह केवल सामाजिक बंधन नहीं, बल्कि समानता, सम्मान और पारस्परिक समझ पर आधारित होना चाहिए। यदि विवाह में ये मूल्य न हों, तो वह जीवन को वास्तव में “नरक का मार्ग” बना देता है। कार्यक्रम में दिनेश दत्त त्रिपाठी ने काव्य पाठ कर साहित्यिक वातावरण को और समृद्ध बनाया। शुरुआत प्रेमचंद के चित्र पर माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि अर्पित कर की गई। इस अवसर पर अतुल यादव, प्रांजल श्रीवास्तव, संगीत श्रीवास्तव, समीक्षा त्रिपाठी, आलोक शिवाजी, डॉ. मनोहर लाल, मनोज श्रीवास्तव, राहुल यादव, रोहित गुप्ता, विपनेश सिंह, संजय श्रीवास्तव एवं राधेश्याम पासवान आदि थे।संचालन आयुषी दूबे,स्वागत मनोज विश्वकर्मा और धन्यवाद ज्ञापन श्रीप्रकाश श्रीवास्तव ने किया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *