
‘भारतीय ज्ञान परम्परा” विषयक
वाराणसी।अंतर विश्वविद्यालय अध्यापक शिक्षा केन्द्र (आईयूसीटीई), वाराणसी द्वारा “भारतीय ज्ञान परम्परा” विषय पर छः दिवसीय ऑनलाइन संकाय विकास कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ।
उद्घाटन सत्र का प्रारंभ डॉ. सुनील कुमार त्रिपाठी, सहायक प्राध्यापक, आईयूसीटीई द्वारा मंगलाचरण, अतिथि परिचय एवं कार्यक्रम की रूपरेखा से हुआ, जिसके पश्चात आईयूसीटीई का परिचयात्मक वीडियो प्रस्तुत किया गया। प्रो. आशीष श्रीवास्तव, संकायाध्यक्ष (शैक्षणिक एवं शोध), आईयूसीटीई ने स्वागत भाषण एवं विषयोपस्थापन किया। साथ ही कार्यक्रम के उद्देश्यों और भारतीय ज्ञान परम्परा को समकालीन शिक्षा से जोड़ने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला।
प्रो. प्रेम नारायण सिंह, निदेशक, आईयूसीटीई ने अध्यक्षीय उद्बोधन में भारतीय ज्ञान परम्परा की समृद्ध विरासत को समझने, संरक्षित करने तथा वर्तमान शिक्षा व्यवस्था में सार्थक रूप से समाहित करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान परम्परा केवल अतीत की धरोहर नहीं है, बल्कि वर्तमान और भविष्य की शिक्षा को अधिक समग्र, मूल्यपरक एवं जीवनोपयोगी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। कार्यक्रम का संचालन डॉ. सुनील कुमार त्रिपाठी ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन डॉ. राजा पाठक द्वारा प्रस्तुत किया गया।
उद्घाटन सत्र के पश्चात डॉ. राजा पाठक, आईयूसीटीई, बीएचयू ने “भारतीय ज्ञान परम्परा की आधारभूत अवधारणाएँ: ज्ञान परम्पराएँ एवं भारतीय ज्ञान का वर्गीकरण” विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने भारतीय ज्ञान परम्परा की विविध ज्ञान धाराओं, उनके स्वरूप तथा भारतीय ज्ञान के वर्गीकरण की अवधारणा को रेखांकित करते हुए बताया कि भारतीय परम्परा में ज्ञान को व्यापक एवं समग्र दृष्टि से देखा गया है। इसके बाद प्रो. आशीष श्रीवास्तव ने “NEP 2020, शिक्षक शिक्षा एवं पाठ्यचर्या एकीकरण” विषय पर चर्चा करते हुए राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप भारतीय ज्ञान परम्परा को शिक्षक शिक्षा एवं पाठ्यचर्या में समाहित करने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला।
उन्होंने भारतीय ज्ञान परम्परा को शिक्षा के विभिन्न स्तरों से जोड़ते हुए शिक्षकों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया तथा पाठ्यचर्या में भारतीय संदर्भों एवं ज्ञान परम्पराओं के समावेशन पर बल दिया।
दिन के अंतिम सत्र में डॉ. अवनीश भटनागर, विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान, नई दिल्ली ने “भारतीय नैतिक मूल्य एवं समग्र शिक्षा की अवधारणा” विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने भारतीय ज्ञान परम्परा में निहित नैतिक मूल्यों, संस्कारों एवं जीवन-दृष्टि को शिक्षा के साथ जोड़ने की आवश्यकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञान एवं कौशल प्रदान करना नहीं, बल्कि व्यक्ति के समग्र व्यक्तित्व का विकास करना भी है। उन्होंने मूल्य-आधारित एवं समग्र शिक्षा के माध्यम से विद्यार्थियों में उत्तरदायित्व, संवेदनशीलता, नैतिक चेतना और सामाजिक प्रतिबद्धता विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया। इस प्रकार कार्यक्रम के प्रथम दिवस में भारतीय ज्ञान परम्परा की आधारभूत समझ के साथ-साथ उसके शिक्षक शिक्षा, पाठ्यचर्या, नैतिक मूल्यों और समग्र शिक्षा से संबंध पर सार्थक अकादमिक विमर्श हुआ।
इस छः दिवसीय कार्यक्रम में 100 से अधिक प्रतिभागी प्रतिभाग कर रहे हैं। कार्यक्रम का संयोजन डॉ. सुनील कुमार त्रिपाठी, सहायक प्राध्यापक, आईयूसीटीई तथा धन्यवाद ज्ञापन डॉ. राजा पाठक, सहायक प्राध्यापक, आईयूसीटीई द्वारा किया जा रहा है।

Leave a Reply