चेयरमैन सरफराज आलम का अपनी ही पार्टी के विधायकों पर तंज, बोले विकास के लिए सरकार नहीं, चाहिए नीयत और हुनर

रिपोर्ट:- उपेन्द्र कुमार पांडेय

 

आजमगढ़। विधानसभा चुनाव की तारीखें जैसे-जैसे नजदीक आ रही हैं, जिले में राजनीतिक सरगर्मियां और चुनावी दावेदारियां बेहद तेज हो गई हैं। ब्लॉक प्रमुखों से लेकर नगरपालिका चेयरमैन तक, तमाम जनप्रतिनिधि अब विधायकी का टिकट पाने की होड़ में शामिल हो चुके हैं। इसी कड़ी में आजमगढ़ नगरपालिका के चेयरमैन सरफराज आलम मंसूर का नाम भी तेजी से चर्चा में आ गया है। वे न केवल विधानसभा चुनाव के लिए अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं, बल्कि अपनी ही पार्टी के विधायकों के रवैये पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

 

अक्सर देखा जाता है कि आजमगढ़ जिले के कई सपा विधायक विकास कार्यों और योजनाओं के मुद्दे पर यह कहते हुए पल्ला झाड़ लेते हैं कि प्रदेश में हमारी सरकार नहीं है, बल्कि भाजपा की सरकार है, तो काम कैसे कराएं?

 

लेकिन नगरपालिका चेयरमैन सरफराज आलम मंसूर ने इस दलील को सिरे से खारिज करते हुए अपनी ही पार्टी के जनप्रतिनिधियों को आईना दिखा दिया है। मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने स्पष्ट कहा कि काम करने के लिए सिर्फ सत्ता की नहीं, बल्कि कार्य कुशलता, नीयत और सही नजरिए की जरूरत होती है।

 

पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए चेयरमैन सरफराज आलम ने कहा मैं भी तो समाजवादी पार्टी से ही चेयरमैन हूँ प्रदेश में क्या मेरी सपा सरकार है, यहाँ भी तो भाजपा की ही सरकार है। लेकिन फिर भी नगरपालिका में विकास कार्य हो रहे हैं और फंड मिल रहा है। जब नीयत साफ हो और काम करने का हुनर हो, तो विपरीत परिस्थितियों में भी जनता की सेवा की जा सकती है। मैंने कभी सरकार न होने का रोना नहीं रोया।

 

जब पत्रकारों ने उनसे पूछा कि क्या वे गोपालपुर या अन्य विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं, तो उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा यदि जनता का प्रेम और मांग है, और पार्टी का शीर्ष नेतृत्व मुझे किसी भी विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने का निर्देश देता है, तो मैं पीछे नहीं हटूंगा। पार्टी जहाँ से कहेगी, वहाँ से चुनाव लड़ने को तैयार हूँ। काम अच्छा किया है या बुरा, इसका नंबर मैं खुद को नहीं दूंगा, यह फैसला जनता जनार्दन करेगी।

 

सरफराज आलम के इस बयान के बाद आजमगढ़ की राजनीति में खलबली मच गई है। एक तरफ जहाँ विपक्ष इसे सपा के अंदरूनी असंतोष और विधायकों की असफलता के रूप में देख रहा है, वहीं दूसरी तरफ आजमगढ़ की जनता के बीच चेयरमैन के इस बेबाक बयान और कार्यशैली की जमकर तारीफ हो रही है। अब देखने वाली बात यह होगी कि आगामी विधानसभा चुनाव में पार्टी नेतृत्व उनकी इस दावेदारी को कितना तवज्जो देता है।

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