
वाराणसी। अखिल भारतीय सनातन न्यास, जैतपुरा वाराणसी द्वारा आयोजित संगीतमय राम कथा के दूसरे दिन अपने प्रवचन में पातालपुरी पीठाधीश्वर अनंत श्री विभूषित श्रीमद् जगतगुरु नरहरियानंद द्वारा आचार्य श्री बालक देवाचार्य जी महाराज ने कहा कि इस घोर कलयुग में भी सांसारिक जीवन में व्यक्ति लगातार निराशा की जिंदगी जी रहा है, ऐसे में एकमात्र यदि उसे खुशहाली एवं परिवार में समृद्धि की आवश्यकता चाहिए तो उसे निरंतर दया, धर्म, दान एवं परोपकार का कार्य करते रहना चाहिए क्योंकि जब राजा दशरथ ने अपने चौथे पन में एक भी पुत्र न होने का दुख हुआ तो उन्होंने सीधे राजगुरु वशिष्ठ जी के आश्रम पर जाकर अपने मन की बात कही, तब उनके भविष्य की चिंता को सही जानकर गुरु वशिष्ठ ने पुत्र कामाग्नि यज्ञ महर्षि श्रृंगी ऋषि से करने की सलाह दी तथा राजा को अपने आश्रम से संतुष्ट होकर विदा किया। प्रथम वक्ता के रूप में पंडित वेद प्रकाश मिश्रा कलाधर जी ने कहा की मंगल रूप भयो मन तब से किनिवास रमापति जागते क्योंकि गोस्वामी तुलसीदास जी ने रामचरितमानस में मंगल शब्द का उल्लेख वहीं किया, जहां प्रसन्नता का प्रसंग है। युद्ध के प्रसंग या विरह में कहीं भी मंगल शब्द का उदाहरण नहीं दिया क्योंकि ज्यादातर बालकांड एवं उत्तराखंड में ही मंगल शब्द का उदाहरण मिलता है।
इस अवसर पर व्यास पीठ की आरती डॉक्टर अजय जायसवाल, मुन्नू लाल, संजय महाराज, राजेश सेठ, रवि प्रकाश जी, विनीत कुमार, अनामिका जी, ज्योति जी, सुधा जायसवाल, डॉक्टर पुष्पा जायसवाल, असीम कुमार, वतन कुशवाहा, वीरेंद्र कुमार, प्रमोद यादव मुन्ना ने आरती उतारी।
