शान ए काशी अलंकृत होने पर शिक्षा जगत ने खुशी का इजहार किया

वाराणसी।इंडियन एसोसिएशन ऑफ जर्नलिस्ट के तत्वावधान में संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी के पाणिनि सभागार में “राष्ट्रीय संगोष्ठी एवं ३०वां राष्ट्रीय अलंकरण समारोह—काशी रत्न© एवं शान-ए-काशी 2025” का गरिमापूर्ण आयोजन संपन्न हुआ। इस अवसर पर वाराणसी जनपद के साहित्य, शिक्षा, विज्ञान, संगीत, पत्रकारिता एवं न्याय के क्षेत्रों में अनुकरणीय योगदान देने वाले विशिष्ट जनों को “काशी रत्न सम्मान” एवं “शान-ए-काशी सम्मान” से विभूषित किया गया।

इस समारोह में बेसिक शिक्षा विभाग, चिरईगांव की सहायक अध्यापिका (वर्तमान में विज्ञान विषय की अकादमिक रिसोर्स पर्सन) के रूप में कार्यरत एक होनहार एवं कर्मठ शिक्षिका श्रीमती रश्मि त्रिपाठी को शिक्षा के क्षेत्र में उनके निरंतर उत्कृष्ट एवं प्रेरणा दायी योगदान के लिए “शान-ए-काशी 2025 सम्मान” प्रदान किया गया।

उनका यह योगदान ग्रामीण अंचल में गुणवत्तापूर्ण एवं वैज्ञानिक शिक्षा के प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। हरियाणा की पर्यवेक्षक टीम के द्वारा इनके कार्यों की प्रसंशा की गई है।ARP (विज्ञान)के पद की परीक्षा में सफल हो कर ये ब्लॉक की प्रथम महिला ARP बनी हैं।

इस समारोह में वाराणसी महिला शिक्षक संघ की पदाधिकारी श्रीमती कल्पना तिवारी, श्रीमती सरिता पांडे एवं श्रीमती सारिका त्रिपाठी जी का भी इंडियन एसोसिएशन का जर्नलिस्ट के द्वारा सम्मान किया गया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर बिहारी लाल शर्मा ने की।मुख्य अतिथि के रूप में पद्मश्री पंडित गणेश शास्त्री द्रविड़ उपस्थित रहे।

विशिष्ट अतिथियों में प्रोफेसर प्रेम नारायण सिंह (निदेशक, अंतर विश्वविद्यालय शिक्षक शिक्षा केंद्र, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय) एवं श्री राजेश गौतम (निदेशक, आकाशवाणी, वाराणसी) ने समारोह को संबोधित किया।

इस भव्य आयोजन के मुख्य संयोजक इंडियन एसोसिएशन ऑफ जर्नलिस्ट के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. कैलाश सिंह विकास रहे। कार्यक्रम के समन्वय में श्री मोतीलाल गुप्ता तथा प्रोफेसर शैलेश कुमार मिश्रा (विभागाध्यक्ष, सामाजिक विज्ञान विभाग, संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय) का विशेष योगदान रहा।

यह आयोजन न केवल समाज के विशिष्ट व्यक्तित्वों को सम्मानित करने का माध्यम बना, बल्कि युवा पीढ़ी को सामाजिक दायित्वों एवं सृजनात्मक योगदान के लिए प्रेरित करने वाला एक सशक्त मंच भी सिद्ध हुआ।

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