कार्यशाला का चौथा दिन 

 

वाराणसी। गुरुवार को अन्तर विश्वविद्यालय अध्यापक शिक्षा केन्द्र, बीएचयू, वाराणसी में 22 से 27 सितंबर 2025 तक छः दिवसीय ‘एकेडमिक लीडरशिप 5.0: नेविगेटिंग नेशनल एंड ग्लोबल ट्रेंड्स’ कार्यक्रम के चौथे दिन की शुरुआत डॉ. ज्ञानेंद्र सिंह, सहायक आचार्य, आईयूसीटीई, वाराणसी के ‘आउटकम-बेस्ड एजुकेशन: एकेडमिक लीडरशिप इन असेसमेंट एंड एवैलुएशन’ विषय पर ओजपूर्ण व्याख्यान से हुई। उन्होंने कहा कि मूल्यांकन की पारदर्शिता, उद्देश्यपरकता और परिणामों की स्पष्टता ही शिक्षा की गुणवत्ता को परिभाषित करती है। साथ ही, यह भी रेखांकित किया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के आलोक में शिक्षकों को परिणाम-आधारित दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता है, जिससे सीखने की प्रक्रिया अधिक प्रभावशाली और उद्देश्यपूर्ण बन सकती है।

दूसरे सत्र में प्रो. अजय कुमार सिंह, आचार्य, आईयूसीटीई, वाराणसी ने ‘एकेडमिक लीडरशिप फॉर सोसाइटी एंड सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स’ विषय पर विचार साझा किए और कहा कि आज के समय में शैक्षणिक नेतृत्वकर्ताओं को केवल संस्थागत सीमाओं तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उसे सामाजिक परिवर्तन और वैश्विक सतत विकास लक्ष्यों की दिशा में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। शिक्षा संस्थानों को सामाजिक उत्तरदायित्व, पर्यावरणीय चेतना और समावेशिता को अपने नेतृत्व मॉडल में शामिल करना चाहिए, जिससे शिक्षा का प्रभाव समाज के हर स्तर तक पहुंचे। तीसरे सत्र में डॉ. अनिल कुमार, आईयूसीटीई, वाराणसी ने “इन्क्लूसिविटी इन हायर एजुकेशन: द रोल ऑफ एकेडमिक लीडर्स” विषय पर सारगर्भित व्याख्यान देते हुए कहा कि समावेशी शिक्षा प्रणाली केवल नीति नहीं, बल्कि नेतृत्व की संवेदनशीलता का परिचायक है। उन्होंने कहा कि शैक्षणिक नेता यदि विविधता को अपनाएं और संस्थानों में समता को बढ़ावा दें, तो उच्च शिक्षा अधिक न्यायसंगत और प्रभावशाली बन सकती है। आज के अंतिम सत्र में प्रो. अजय कुमार सिंह, आचार्य, आईयूसीटीई, वाराणसी ने ‘समूह चर्चा एवं प्रस्तुति’ सत्र में प्रतिभागियों से प्रभावी आकलन, सतत् विकास लक्ष्य तथा उच्च शिक्षा में समावेशन पर विस्तार से विचार-विमर्श किया और प्रतिभागियों ने अपने विचार साझा किए।

इस छः दिवसीय संकाय विकास कार्यक्रम में देश के 20 से अधिक राज्यों यथा उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, बिहार, झारखंड, महाराष्ट्र, नई दिल्ली इत्यादि के 100 से अधिक प्रतिभागी भाग ले रहे हैं। इस कार्यशाला का संयोजन डॉ० अनिल कुमार और सह-संयोजन डॉ० सुनील कुमार त्रिपाठी द्वारा किया जा रहा है।

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