वाराणसी। वेद एवं सनातन वैदिक धर्म के यथार्थ प्रवक्ता, ‘वेदों की ओर लौटो’ के उद्घोषक और उन्नीसवीं सदी के नवजागरण के पुरोधा महर्षि दयानन्द सरस्वती की 202वीं जयंती के अवसर पर जिला आर्य प्रतिनिधि सभा वाराणसी के निर्देश पर विभिन्न आर्य समाजों द्वारा प्रातःकालीन यज्ञ एवं प्रसाद वितरण कार्यक्रम आयोजित किए गए। इसी क्रम में सिगरा स्थित लाल बहादुर शास्त्री पार्क के समीप जिला आर्य प्रतिनिधि सभा के तत्वावधान में आर्य समाज लल्लापुरा एवं आर्य समाज भोजूवीर के सहयोग से यज्ञ, ऋषि चर्चा और प्रसाद वितरण का आयोजन हुआ। कार्यक्रम में महर्षि दयानन्द सरस्वती के सामाजिक एवं धार्मिक योगदान को स्मरण किया गया। वक्ताओं ने कहा कि महर्षि दयानन्द ने समाज में समता, शिक्षा और वैदिक मूल्यों की स्थापना के लिए महत्वपूर्ण कार्य किए। उनके ‘वेदों की ओर लौटो’ के संदेश ने समाज में नई चेतना का संचार किया तथा छुआ-छूत और ऊँच-नीच जैसे भेदभावों को समाप्त करने की दिशा में प्रेरणा दी। यज्ञ का अनुष्ठान जिला सभा के प्रधान प्रमोद आर्य आर्षेय के आचार्यत्व में तथा यजमान सी.ए. विष्णु प्रसाद के साथ संपन्न हुआ। प्रधान प्रमोद आर्य ने ऋषि चर्चा में कहा कि महर्षि दयानन्द महान योगी, वेदज्ञ और समाज सुधारक थे, जिन्होंने भारतीय संस्कृति के गौरव को पुनर्स्थापित करने का कार्य किया। उन्होंने ऋषि के आदर्शों को जीवन में अपनाने का आह्वान किया।

सी.ए. विष्णु प्रसाद ने अपने वक्तव्य में कहा कि महर्षि दयानन्द की अमर कृति सत्यार्थ प्रकाश का अध्ययन कर ही सत्य सनातन वैदिक धर्म के मार्ग को समझा जा सकता है। प्रद्युम्न आर्य ने ऋषि गीत प्रस्तुत कर वातावरण को वैदिक भाव से ओतप्रोत कर दिया।

कार्यक्रम में मंत्री रवि प्रकाश आर्य, कोषाध्यक्ष प्रदीप आर्य, चन्द्रपाल आर्य, रवि प्रकाश बरनवाल, राजकुमार वैद्य, चन्द्रदीप आर्य, सुशील आर्य, डॉ. अनिल मित्रा, गोपाल आर्य, कृष्ण कुमार आर्य, अखिलेश आर्य, सूरज प्रकाश बरनवाल, अधिवक्ता विन्ध्वासिनी पाठक, वेद प्रकाश बृजवासी, वेद प्रकाश आर्य, विजय आर्य, सत्येंद्र आर्य सहित अनेक पदाधिकारी व सदस्य उपस्थित रहे।

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