
वाराणसी। आर्य वीर दल पूर्वी उत्तर प्रदेश ने स्वामी श्रद्धानन्द जी की 170वीं जयन्ती के अवसर पर एक दिवसीय संगोष्ठी, कार्यकर्ता गोष्ठी एवं कार्यशाला का आयोजन किया। यह कार्यक्रम आर्य समाज भोजूवीर वाराणसी में प्रातःकालीन वैदिक यज्ञ से प्रारंभ हुआ। यज्ञ का आचार्यत्व आचार्य ज्ञान प्रकाश वैदिक ने किया, और यजमान के रूप में आर्य रवि प्रकाश बरनवाल तथा यशोदा बरनवाल ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। इस अवसर पर आर्य वीर दल के प्रधान संचालक आचार्य नन्दकिशोर आर्य ने महर्षि दयानन्द सरस्वती जी के योगदान पर प्रकाश डाला और कहा कि आर्य वीर दल की स्थापना आज के युवा पीढ़ी को नशा प्रवृत्ति और नैतिक पतन से बचाने के लिए अत्यंत आवश्यक है। कार्यशाला में पूर्वी उत्तर प्रदेश के 6 कमिश्नरियों एवं 22 जनपदों से आये प्रतिनिधियों ने सक्रिय सहभागिता की। इस दौरान कार्यकारिणी का चयन किया गया और पदाधिकारियों को नियुक्ति पत्र प्रदान किये गए। आचार्य नन्दकिशोर आर्य के मार्गदर्शन में कार्यक्रम दो सत्रों में सम्पन्न हुआ, जिसमें संगठन की वर्तमान स्थिति, चुनौतियाँ एवं भविष्य की योजनाओं पर गहन विचार-विमर्श हुआ। कार्यशाला के अध्यक्ष, प्रमोद आर्य ‘आर्षेय’ ने संगठन की प्रगति के लिए प्रशिक्षित कार्यकर्ताओं के महत्व को रेखांकित किया। आगामी कार्यक्रमों की घोषणा करते हुए आचार्य ज्ञान प्रकाश वैदिक ने बताया कि 22 से 30 मई 2026 तक बलिया में प्रान्तीय आर्य वीर प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया जाएगा। इसके अलावा, 7 से 14 जून 2026 तक आर्य वीरांगना प्रशिक्षण शिविर भी प्रस्तावित है।
कार्यक्रम में कई प्रमुख पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित थे, जिनमें कमल सिंह आर्य, संजीत आर्य, राजेश आर्य, सागर आर्य, इंदल आर्य, चंद्रदीप आर्य, वेद प्रकाश, आनंद आर्य, अशोक आर्य, राकेश विद्यालंकार, विजय आर्य, वीरेंद्र आर्य आदि शामिल थे। कार्यक्रम का समापन शांति पाठ एवं धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।
*संगोष्ठी की मुख्य बातें:*
महर्षि दयानन्द सरस्वती जी के योगदान की सराहना
आर्य वीर दल की अहम भूमिका पर चर्चा
आगामी कार्यक्रमों की घोषणा: आर्य वीर प्रशिक्षण शिविर एवं आर्य वीरांगना प्रशिक्षण शिविर100 नई शाखाओं के गठन का निर्णय।
