
वाराणसी। मुंशी प्रेमचंद की जन्मभूमि लमही में आयोजित साप्ताहिक साहित्यिक कार्यक्रम “सुनो मैं प्रेमचंद” के 1896वें दिवस पर उनकी मार्मिक कहानी दो कब्रें का पाठन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन प्रेमचंद मार्गदर्शन केंद्र ट्रस्ट द्वारा किया गया, जिसमें साहित्यप्रेमियों, विद्यार्थियों और शोधार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम का शुभारंभ प्रेमचंद की प्रतिमा पर माल्यार्पण से हुई। डॉ. वत्सला श्रीवास्तव ने कहानी का भावपूर्ण पाठ किया। इस अवसर पर सुरेश चंद्र दुबे ने कहा कि यह कहानी सांप्रदायिक सौहार्द, मानवीय संवेदना और सामाजिक कट्टरता पर गहरा प्रहार करती है।
डॉ. संजय श्रीवास्तव ने कहा कि समाज अक्सर प्रेम से अधिक नियमों को महत्व देता है, जबकि डॉ. मनोहर लाल ने इसे मानवता को धर्म से ऊपर रखने वाली रचना बताया। निदेशक राजीव गोंड ने बताया कि श्रृंखला आगे भी जारी रहेगी। कार्यक्रम का संचालन आयुषी दूबे ने किया।
