
कथा का दूसरा दिन
वाराणसी ।श्री कृष्ण उत्सव सेवा समिति के तत्वावधान में रामकटोरा स्थित कसेरा धर्मशाला चिंतामणी बाग में श्रीमद् भागवत कथा चल रही है।
कथा के दूसरे दिन जगतगुरु पातालपुरी महन्त परम पूज्य श्री बालक देवाचार्य जी ने श्रोताओं को कथावाचन कर बताया कि मुख्य वक्ता श्री शुकदेव जी महाराज एवं श्रोता राजा परीक्षित थे ,जिसे गंगा जी के पावन तट पर सुनाया गया।
श्रीमद् भागवत महापुराण में बारह स्कन्द 335 अध्याय एवं 18000 श्लोक समाहित है।
इस महापुराण के आदि वक्ता भगवान विष्णु एवं आदि श्रोता ब्रह्मा जी है। मनुष्य को चाहिए की अपनी पांचों ज्ञानेन्द्रियों और पांचों कर्मेन्द्रियों से एकाग्र भाव से श्रीमद्भागवत की कथा सुने।
उन्होंने कहा श्रीमद्भागवत में भगवान के सभी अंगों के दर्शन से क्या क्या लाभ होता है ।
चरण दर्शन से पाप निवृत्ति ,रज से अज्ञान का नाश ,जाँघ से रोग नाश, नाभि से व्याधि का अंत ,बांह से भय से निवृत्ति ,रुप से शत्रु नाश नाश ,कंठ से शोकनाश ,मुख से मुक्ति एवं मुकुट दर्शन मुक्ति दायक होता है।
भगवान हमेशा हमारे शरीर में व्याप्त है जो कि छाया रूप में विराजमान है। भगवान जो भी करते है वह हमारे भलाई के लिये करते है हमें जो भी प्रतिकूल समझ आता है वह हमारा प्रारब्ध होता है। कथा में अन्य छोटी छोटी ज्ञानवर्द्धक जानकारी व्यास जी द्वारा दी गयी।
कथा में आये विशिष्ठ जन एवं श्रद्धालुओं का स्वागत भाषण संस्था के आचार्य कलाधर गुरु ने किया। प्रातः भागवत जी का परायण एवं पूजन किया गया।अध्यक्ष अशोक कसेरा के अनुसार
कथा में श्रद्धालुओं को कथा श्रवण करने में परेशानी नहीं हो।इस लिए हर सम्भव सुविधाओं का ध्यान रखते हुए कूलर पंखा व जल की पूर्ण व्यवस्था की गई है।आज के कथा के मुख्य यजमान महामन्त्री श्री विनोद कसेरा धर्मपत्नी श्रीमती राजकुमारी एवं कोषाध्यक्ष भईया लाल धर्मपत्नी श्रीमती रामकुमारी देवी रही।
श्री हैहय वंशी क्षत्रिय कसेरा महासभा के पदाधिकारियों ने महाआरती की।
प्रसाद सेवा श्री हैहय वंशीय क्षत्रिय कसेरा महासभा एवं हैहय वंशीय क्षत्रिय कसेरा महिला कला केंद्र और घनश्याम कसेरा ने उपस्थित श्रोताओं व भक्तों को प्रसाद वितरित किया।
मनोज कसेरा ,केदार नाथ श्रीमद् भागवत कथा में झल्लु ,भरत कसेरा का विशेष योगदान रहा।









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