चित्रकला कल्पनाशक्ति, संवेदनशीलता एवं सांस्कृतिक चेतना की सशक्त अभिव्यक्ति:-कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा

वाराणसी। सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी में 44वें दीक्षान्त महोत्सव के उपलक्ष्य में गुरुवार को योग साधना केन्द्र में चित्रकला प्रतियोगिता का भव्य आयोजन किया गया।

कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा के संरक्षण एवं मार्गदर्शन में आयोजित इस प्रतियोगिता का उद्देश्य विद्यार्थियों में सृजनात्मकता, कलात्मक अभिव्यक्ति, सौन्दर्यबोध तथा भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों के प्रति जागरूकता का संवर्धन करना था।

विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों एवं संबद्ध महाविद्यालयों के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए अपनी उत्कृष्ट कलात्मक प्रतिभा का प्रभावशाली प्रदर्शन किया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने कहा कि चित्रकला केवल रंगों का संयोजन नहीं, बल्कि मनुष्य की कल्पनाशक्ति, संवेदनशीलता एवं सृजनात्मकता की सशक्त अभिव्यक्ति है। उन्होंने कहा कि ऐसी प्रतियोगिताएँ विद्यार्थियों की अंतर्निहित प्रतिभा को निखारने के साथ-साथ उनमें सौन्दर्यबोध, सांस्कृतिक चेतना तथा सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना का विकास करती हैं।

उन्होंने कहा कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल ज्ञानार्जन तक सीमित नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के व्यक्तित्व का सर्वांगीण विकास करना है। विश्वविद्यालय भविष्य में भी साहित्यिक, सांस्कृतिक एवं रचनात्मक गतिविधियों का सतत आयोजन करता रहेगा, ताकि विद्यार्थियों की प्रतिभाओं को समुचित मंच प्राप्त हो सके।

कार्यक्रम की समन्वयक प्रो. विद्या कुमारी चंद्रा ने कहा कि चित्रकला विद्यार्थियों की सृजनात्मक अभिव्यक्ति का अत्यंत प्रभावी माध्यम है। इस प्रकार की प्रतियोगिताएँ उनकी कल्पनाशक्ति, मौलिक चिंतन एवं कलात्मक दक्षता को विकसित करने का सशक्त अवसर प्रदान करती हैं।

उन्होंने कहा कि 44वें दीक्षान्त महोत्सव के अंतर्गत आयोजित विभिन्न शैक्षणिक, साहित्यिक, सांस्कृतिक एवं रचनात्मक कार्यक्रम विद्यार्थियों के बहुआयामी व्यक्तित्व निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने सभी प्रतिभागियों के उत्कृष्ट प्रदर्शन की सराहना करते हुए भविष्य में भी ऐसे आयोजनों में सक्रिय सहभागिता का आह्वान किया।

प्रतियोगिता का सफल संयोजन डॉ. रविशंकर पाण्डेय, डॉ. सत्येन्द्र कुमार यादव एवं डॉ. ज्ञानेन्द्र सापकोटा ने किया। कार्यक्रम के समापन पर डॉ. रविशंकर पाण्डेय एवं डॉ. सत्येन्द्र कुमार यादव ने सभी अतिथियों, शिक्षकों, प्रतिभागियों एवं आयोजन समिति के प्रति आभार व्यक्त किया।

इस अवसर पर डॉ. नितिन आर्य, डॉ. सुमीता, डॉ. पासांग, डॉ. अर्पिता सहित विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के शिक्षक, अधिकारी, कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।

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