भाटपार रानी।बरहज में परमाराध्य परमधर्माधीश, उत्तराम्नाय ज्योतिष्पीठाधीश्वर, जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज के ऐतिहासिक 81 दिवसीय ‘गौवी (गौरक्षार्थ धर्मयुद्ध)’ के चौथे दिन, पूज्य महाराजश्री ने बाबा महेन्द्रनाथ जी मंदिर (बरहज विधानसभा) एवं भाटपाररानी विधानसभा में श्रद्धालुओं की विशाल सभाओं को संबोधित किया।

यात्रा काफिले का खपरवार चौराहा शिव मंदिर, भटनी गांव तथा अनेक स्थलों पर भव्य स्वागत हुआ। प्रत्येक स्थान पर उपस्थित जनसमुदाय ने वैदिक मंत्र “अहं हनं वृत्रं गविष्ठौ” के साथ गौ रक्षा का सामूहिक संकल्प लिया।

महाराजश्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि हिन्दुओं के घर में जब रोटी बनती है, तो पहली रोटी गौ माता की होती है — न भगवान की, न घर के बुजुर्गों की, न बच्चों की। यही हिन्दू धर्म का प्राचीन सनातन क्रम है, जो बताता है कि गौ माता का स्थान सर्वोच्च है।

उन्होंने कहा कि अंग्रेजों ने इस देश में गौ हत्या प्रारंभ की थी और उसके विरोध में हमने 30 वर्षों तक स्वतंत्रता की लड़ाई लड़ी, लेकिन स्वतंत्रता के 78 वर्षों बाद आज स्थिति यह है कि हम स्वयं अपनी गौ माता को काटकर विदेशों में भेज रहे हैं और उसके बदले में डॉलर ले रहे हैं।

महाराजश्री ने कहा कि बीफ़ निर्यात में भारत आज विश्व में ब्राजील के बाद दूसरे स्थान पर है। उन्होंने इसे अत्यंत पीड़ादायक बताते हुए कहा कि जो सरकार अपने आप को हिन्दू कहती है, उसके शासनकाल में यह समस्या और गहरी हुई है।

उत्तर प्रदेश में देशी गायों की संख्या में पिछले पाँच वर्षों में 4.8 लाख से अधिक की कमी आई है — यह आँकड़े स्वयं सरकार के हैं।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री का काम गौशाला में जाकर रोटी-गुड़ खिलाने का फोटो खिंचवाना नहीं, बल्कि गौ रक्षा के लिए ठोस कानून बनाना है — और जिस पद पर बैठकर यह कानून बन सकता था, वहाँ बैठकर भी यह नहीं किया गया।

महाराजश्री ने असम चुनाव के एक प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि वहाँ के मुख्यमंत्री से एक पत्रकार ने पूछा — “आपको गौ हत्यारों का वोट चाहिए?” तो उन्होंने बिना देर किए उत्तर दिया — “क्यों नहीं चाहिए?”

महाराजश्री ने उपस्थित जनसमुदाय से प्रश्न किया कि जिसे गौ हत्यारों का वोट चाहिए, उसे गौ भक्तों का वोट कैसे मिल सकता है?

उन्होंने कहा कि एक ही मटके में गाय का दूध और खून एक साथ नहीं रखा जा सकता। इसलिए गौ भक्त हिन्दू समाज को यह पक्का संकल्प लेना होगा कि जो पार्टी गौ माता की रक्षा का स्पष्ट वचन नहीं देती, उसे वोट देना बंद करें।

महाराजश्री ने भाजपा, सपा, बसपा और कांग्रेस सभी को एक साथ आड़े हाथों लेते हुए कहा कि 78 वर्षों में सभी पार्टियाँ सत्ता में रही हैं, लेकिन किसी ने भी गौ माता की रक्षा के लिए ठोस कार्य नहीं किया।

उन्होंने कहा कि “विकल्प क्या है” यह प्रश्न उठाकर ये पार्टियाँ यह मान लेती हैं कि हिन्दू इतना मजबूर है कि वह गाय की हत्या देखते हुए भी इन्हीं को वोट देता रहेगा।

उन्होंने आह्वान किया कि जो गृहस्थ सनातनी वेद और शास्त्र को प्रमाण मानता हो और गौ माता का भक्त हो, उसे आगे आकर राजनीति में प्रवेश करना चाहिए और समाज को उसे पूरा समर्थन देना चाहिए।

महाराजश्री ने गौ माता की महिमा पर राजा दिलीप की कथा का वर्णन किया। उन्होंने बताया कि राजा दिलीप को वृद्धावस्था में भी संतान प्राप्त नहीं हुई थी। तब गुरु वशिष्ठ ने उन्हें गौ सेवा का उपदेश दिया।

राजा दिलीप ने 40 दिनों तक निष्ठापूर्वक नन्दिनी गाय की सेवा की और अंततः उसी गौ माता के आशीर्वाद से उनके वंश में रघु, अजय, दशरथ और अंत में भगवान राम का जन्म हुआ।

महाराजश्री ने कहा कि गाय केवल दूध देने की मशीन नहीं है, बल्कि वह 33 करोड़ देवताओं की अधिष्ठात्री है और उनके रोम-रोम से निकला आशीर्वाद फलित होता है।

महाराजश्री ने शास्त्र वचन उद्धृत किया —

“अनुमन्ता विशसिता निहन्ता क्रय-विक्रयी।

संस्कर्ता चोपहर्ता च खादकश्चेति घातकाः॥”

अर्थात गौ हत्या की अनुमति देने वाला, काटने वाला, खरीदने-बेचने वाला, पकाने वाला, परोसने वाला और खाने वाला — ये सभी गौ हत्या के पापी हैं।

उन्होंने कहा कि जो पार्टी गौ हत्या को बढ़ावा देती है, उसे वोट देने वाले भी इस पाप के सहभागी बनते हैं।

उन्होंने आह्वान किया कि अपने घरों और गांवों में बोर्ड लगाएँ —

“इस घर में गौ रक्षा का संकल्पधारी हिन्दू रहता है — गौ हत्या से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष संबंध रखने वाली कोई भी पार्टी वोट के लिए संपर्क न करे।”

सभा के अंत में महाराजश्री ने पुनः घोषणा की कि यदि 81 दिनों की यात्रा पूर्ण होने तक सरकार ने गौ रक्षा के लिए ठोस कदम नहीं उठाए, तो 24 जुलाई को लखनऊ में एक अक्षौहिणी सेना (2,18,700 सैनिक) के साथ खड़े होकर अगले चरण की घोषणा की जाएगी।

उपस्थित लोगों से आग्रह किया गया कि वे पीला कुर्ता, लाल धोती और पीला दुपट्टा (फेंटा) पहनकर लखनऊ पहुँचें।

साथ ही प्रत्येक विधानसभा में एक भव्य गौधाम निर्माण की परियोजना की घोषणा की गई, जिसके लिए प्रत्येक व्यक्ति से ₹1 से ₹500 तक का योगदान माँगा गया।

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