
रिपोर्ट अशरफ/आजाद
प्रयागराज।मुहर्रमुल हराम से ग़म-ए-हुसैन का आग़ाज़ होता है। यह महीना हमें सब्र, कुर्बानी, हक़ और इंसाफ़ की राह पर चलने का पैग़ाम देता है।
“या हुसैन” की सदाओं के साथ हम शहीद-ए-कर्बला Imam Hussain और उनके वफ़ादार साथियों की अज़ीम कुर्बानियों को ख़िराज-ए-अक़ीदत पेश करते हैं।
माह-ए-मुहर्रम का चाँद नज़र आ गया है,
ग़म-ए-शबे़र का सिलसिला शुरू हो गया है।
या अल्लाह! हमें अहले बैत की मोहब्बत और उनकी सीरत पर चलने की तौफ़ीक़ अता फ़रमा।
“सलाम उन पर, जिन्होंने दीन-ए-इस्लाम की हिफ़ाज़त के लिए अपनी हर चीज़ कुर्बान कर दी।”












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