भूमि की उर्वरता बढ़ती है तथा किसानों की आय में वृद्धि होती है:-हंसराज विश्वकर्मा

वाराणसी। कृषि विभाग द्वारा कृषक उत्पादक संघ (एफपीओ) एनसीडीसी प्रशिक्षण केंद्र, टिकरी में गुरवार को जनपद स्तरीय खरीफ उत्पादकता गोष्ठी एवं प्राकृतिक खेती कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम में जनपद एवं प्रदेश स्तर के जनप्रतिनिधियों, कृषि वैज्ञानिकों, कृषि अधिकारियों तथा 500 से अधिक प्रगतिशील किसानों ने सहभागिता की।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रदेश के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग राज्य मंत्री हंसराज विश्वकर्मा रहे। विशिष्ट अतिथियों के रूप में पूनम मौर्य, जिला पंचायत अध्यक्ष, डॉ. सुनील पटेल, विधायक रोहनिया, राम प्रकाश सिंह ‘वीरू’, जिला अध्यक्ष किसान मोर्चा, राम सकल पटेल, जिला अध्यक्ष भारतीय जनता पार्टी, संतोष कुमार राय, संयुक्त कृषि निदेशक (गुणवत्ता नियंत्रण), लखनऊ, शैलेंद्र कुमार, संयुक्त कृषि निदेशक, अमित जायसवाल, उप कृषि निदेशक, तथा संगम सिंह, जिला कृषि अधिकारी उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का शुभारम्भ दीप प्रज्वलन एवं सरस्वती वंदना के साथ हुआ। आगंतुक अतिथियों का स्वागत उप कृषि निदेशक अमित जायसवाल द्वारा किया गया। उन्होंने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए खरीफ फसलों की उत्पादकता वृद्धि, उन्नत कृषि तकनीकों के प्रसार तथा प्राकृतिक खेती को जन-आंदोलन बनाने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम का संचालन जिला कृषि अधिकारी संगम सिंह द्वारा किया गया। उन्होंने किसानों को विभागीय योजनाओं, खरीफ फसल प्रबंधन, गुणवत्तायुक्त बीजों के उपयोग, संतुलित उर्वरक प्रबंधन तथा जल संरक्षण तकनीकों के संबंध में विस्तार से जानकारी प्रदान की।

अपने संबोधन में राज्यमंत्री हंसराज विश्वकर्मा ने किसानों से प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के साथ कृषि को अधिक लाभकारी बनाने हेतु प्राकृतिक खेती अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती से उत्पादन लागत में कमी आती है, भूमि की उर्वरता बढ़ती है तथा किसानों की आय में वृद्धि होती है। उन्होंने कृषि एवं उद्यमिता को जोड़कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने पर बल दिया।

जिला पंचायत अध्यक्ष पूनम मौर्य ने किसानों को कृषि विभाग द्वारा संचालित योजनाओं का अधिकतम लाभ उठाने का आग्रह किया तथा प्राकृतिक खेती को स्वास्थ्य एवं पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से महत्वपूर्ण बताया। विधायक रोहनिया डॉ. सुनील पटेल ने किसानों को वैज्ञानिक खेती के साथ-साथ प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि कृषि क्षेत्र में नवाचार एवं आधुनिक तकनीकों के उपयोग से किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि संभव है। संयुक्त कृषि निदेशक (गुणवत्ता नियंत्रण), लखनऊ संतोष कुमार राय ने गुणवत्तायुक्त कृषि आदानों के उपयोग तथा प्रमाणित बीजों के महत्व पर प्रकाश डाला। वहीं संयुक्त कृषि निदेशक श्री शैलेंद्र कुमार ने खरीफ मौसम में फसल प्रबंधन, जलवायु अनुकूल कृषि तकनीकों तथा विभागीय कार्यक्रमों की जानकारी किसानों को दी।

कार्यशाला के दौरान किसानों को प्राकृतिक खेती की लाइव डेमॉन्स्ट्रेशन कर विभिन्न प्राकृतिक कृषि तकनीकों, जीवामृत, घनजीवामृत, बीजामृत तथा अन्य जैविक एवं प्राकृतिक कृषि इनपुट तैयार करने की विधियों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। किसानों ने प्रदर्शन का अवलोकन कर विशेषज्ञों से सीधे संवाद स्थापित किया। कृषि विभाग द्वारा कार्यक्रम में उपस्थित किसानों को खरीफ फसलों के मिनीकिट तथा प्राकृतिक खेती संबंधी साहित्य का भी वितरण किया गया ताकि किसान उन्नत तकनीकों एवं प्राकृतिक खेती के सिद्धांतों को अपने खेतों में अपनाकर उत्पादन एवं आय में वृद्धि कर सकें।कार्यक्रम में उपस्थित किसानों ने प्राकृतिक खेती एवं खरीफ फसल उत्पादन संबंधी विभिन्न विषयों पर अपने प्रश्न रखे, जिनका विशेषज्ञों एवं अधिकारियों द्वारा समाधान किया गया। किसानों ने इस प्रकार की उपयोगी कार्यशालाओं के आयोजन के लिए कृषि विभाग का आभार व्यक्त किया।

कार्यक्रम का समापन किसानों को खरीफ मौसम में वैज्ञानिक एवं प्राकृतिक खेती आधारित तकनीकों को अपनाने तथा कृषि विभाग की योजनाओं का लाभ उठाने के आह्वान के साथ हुआ। कुल 500 से अधिक किसानों की सहभागिता के साथ आयोजित यह कार्यशाला खरीफ उत्पादन वृद्धि एवं प्राकृतिक खेती के व्यापक प्रसार की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सिद्ध हुई।

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