
वाराणसी। अधिवक्ता विनोद पांडे भैयाजी व नित्यानन्द राय के नेतृत्व मे कैंटोमेन्ट स्थित रानी लक्ष्मीबाई के 25 फ़ीट ऊँची प्रतिमा स्थल पर पहुँचे वहाँ 168 दिए जलाए अधिवक्ताओं ने रानी लक्ष्मीबाई के शहादत दिवस पर लक्ष्मीबाई की प्रतिमा पर पुष्प वर्षा भी की अधिवक्ताओं ने रानी लक्ष्मीबाई अमर रहें जब तक सूरज चाँद रहेगा लक्ष्मीबाई आपका नाम रहेगा भारत माता की जय वन्देमातरम के गगनभेदी नारे लगाए।अधिवक्ताओ मे अनुप मिश्रा जंसा,विजय पाण्डेय दिव्यांग उदयनाथ शर्मा, रमेश वाधवानी ,नवीन चौबे ,पंकज उपाध्याय ,शैलेन्दर चौबे आशीष सिंह आदि रहे
मुख्वय वक्ता नित्यानन्द राय नेबताया कि लक्ष्मीबाई का जन्म वाराणसी में 19 नवम्बर 1828 को हुआ था। बचपन का नाम मणिकर्णिका था लेकिन प्यार से उन्हें मनु कहते थे उनकी माँ भागीरथीबाई और पिता मोरोपंत तांबे थे 1842 में उनका विवाह झाँसी के मराठा शासित राजा गंगाधर राव नेवालकर के साथ हुआ और वे झाँसी की रानी बनीं। विवाह के बाद उनका नाम लक्ष्मीबाई रखा गया। सितंबर 1851 में रानी लक्ष्मीबाई ने एक पुत्र को जन्म दिया। परन्तु चार महीने की उम्र में ही उसकी मृत्यु हो गयी। सन् 1853 में राजा गंगाधर राव का स्वास्थ्य बहुत अधिक बिगड़ जाने पर उन्हें दत्तक पुत्र लेने की सलाह दी गयी। पुत्र गोद लेने के बाद 21 नवम्बर 1853 को राजा गंगाधर राव की मृत्यु हो गयी। दत्तक पुत्र का नाम दामोदर राव रखा गया।
18 जून 1858 को ग्वालियर के पास कोटा की सराय में ब्रितानी सेना से लड़ते-लड़ते रानी लक्ष्मीबाई की मृत्यु हो गई। ल जनरल ह्यूरोज़ ने कहा कि रानी लक्ष्मीबाई विद्रोही नेताओं में सबसे अधिक ख़तरनाक भी थी












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