मानवता को शर्मसार करने वाला एक बेहद संवेदनशील मामला

 

रिपोर्ट उपेन्द्र कुमार पांडेय

 

आजमगढ़।जनपद से सामने आया है। स्थानीय दीवानी न्यायालय परिसर में नए अधिवक्ता भवन के पास पिछले पांच दिनों से एक बेजुबान बंदर जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ रहा है। अत्यंत लाचार और मरणासन्न अवस्था में पड़ा यह बंदर अपनी आखिरी सांसें गिन रहा है, लेकिन विडंबना यह है कि संबंधित विभाग और जिम्मेदार अधिकारी पूरी तरह बेखबर और मूकदर्शक बने हुए हैं। ​प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय अधिवक्ताओं के मुताबिक, दीवानी न्यायालय परिसर स्थित नए अधिवक्ता भवन के समीप यह बंदर पिछले पांच दिनों से एक ही जगह पर असहाय पड़ा हुआ है। वह हिलने-डुलने में भी पूरी तरह अस्मर्थ है। ​इस मामले ने वन्यजीवों की सुरक्षा और पशु क्रूरता निवारण के दावों की पोल खोलकर रख दी है। परिसर के कुछ संवेदनशील अधिवक्ताओं ने इस पर गहरी चिंता व्यक्त की है।

उनका कहना है कि एक तरफ सरकार पशु-पक्षियों के संरक्षण के बड़े-बड़े दावे करती है, वहीं दूसरी तरफ न्याय के सबसे बड़े केंद्र में एक बेजुबान पांच दिनों से तड़प रहा है। ​स्थानीय प्रबुद्ध वर्ग और जीव प्रेमियों ने जिला प्रशासन, वन विभाग और मुख्य पशु चिकित्साधिकारी से तत्काल इस मामले का संज्ञान लेने की मांग की है। मांग की गई है कि बिना किसी देरी के पशु चिकित्सकों की एक टीम मौके पर भेजी जाए, ताकि इस लाचार बंदर को उचित इलाज और रेस्क्यू मिल सके और उसकी जान बचाई जा सके।

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