
छींटे’ केवल पानी या कीचड़ के नहीं, सामाजिक व्यवस्था के प्रतीक हैं
वाराणसी। प्रेमचंद मार्गदर्शन केंद्र लमही की ओर से रविवार को प्रेमचंद की स्मृति में ‘सुनो मैं प्रेमचंद’ कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में प्रेमचंद की कहानी ‘पाप का मोटर के छींटे’ का पाठ वरिष्ठ कवि आशिक कुमार राय ने किया। कहानी की समीक्षा करते हुए ट्रस्ट निदेशक राजीव गोंड ने कहा कि मोटर आधुनिकता, सम्पन्नता और प्रभुत्व का प्रतीक है, जबकि उसके छींटे आर्थिक और सामाजिक रूप से कमजोर लोगों पर पड़ते हैं। ‘छींटे’ केवल पानी या कीचड़ के नहीं, बल्कि ऐसी सामाजिक व्यवस्था के प्रतीक हैं, जहां शक्तिशाली व्यक्ति अपनी सुविधा के लिए कमजोर की गरिमा और अधिकारों की परवाह नहीं करता। इससे पहले प्रेमचंद के चित्र पर माल्यार्पण व पुष्पांजलि अर्पित की गई। संचालन आयुषी दूबे, स्वागत राजेश श्रीवास्तव और धन्यवाद प्रकाश चन्द्र श्रीवास्तव ने किया।

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