
वाराणसी। जेठ माह की पूर्णिमा तिथि को भक्तों द्वारा अत्यधिक स्नान कर दिए जाने के कारण भगवान जगन्नाथ बलभद्र और बहन सुभद्रा बीमार हो गए हैं। रात्रि में तीनों देव प्रतीकात्मक रूप से एकांतवास के लिए प्रस्थान कर गए।
मंगलवार को सांयकाल मंदिर के प्रधान पुजारी राधे श्याम पांडे भगवान को कालीमिर्च, लौंग, छोटी और बड़ी इलायची, जायफल, खांडसारी तथा तुलसी से तैयार विशेष काढ़े का भोग अर्पित किये । धार्मिक मान्यता के अनुसार यही औषधीय प्रसाद भगवान के स्वास्थ्य लाभ का प्रतीक माना जाता है। मंदिर के मीडिया प्रभारी रामयश मिश्र ने बताया कि आज काढे का प्रसाद लेने के लिए भक्तों की भारी भीड़ मंदिर में लगी हुई थी औषधि युक्ति कार्य के प्रसाद से लोगों की सर्दी खांसी और पेट के तमाम रोग ठीक हो जाते हैं।
पुजारी राधेश्याम पांडे जी स्वयं मिट्टी के चूल्हे पर पारंपरिक काढे को बनाया और भगवान को अर्पित किया।
रामयश मिश्रा ने बताया कि आस्था, परंपरा और विश्वास का यह उत्सव केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि काशी की सांस्कृतिक विरासत का जीवंत प्रतीक है। हर वर्ष की तरह इस बार भी भगवान का गणेश स्वरूप, स्नान यात्रा और एकांतवास यह संदेश दे गया कि दिव्यता केवल दर्शन में नहीं, बल्कि उन परंपराओं में भी बसती है जिन्हें पीढ़ियां पूरी श्रद्धा के साथ जीवित रखती आई हैं।











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