चंद्रा साहित्य परिषद (ट्रस्ट) ने गजलकार गोपाल केशरी का किया सम्मान

सवाराणसी।स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर चंद्रा साहित्य परिषद (ट्रस्ट) ने शुक्रवार को नरेश निवास इंदिरा नगर, चितईपुर वाराणसी

में ” एक शाम शहीदों के नाम ” काव्य गोष्ठी एवं सम्मान समारोह का आयोजन किया गया I

इस कार्य क्रम में संस्था के पदाधिकारी एवं पूर्वांचल के वरिष्ठ रचनाकार उपस्थित रहे I

कार्यक्रम की मुख्य अतिथि सुविख्यात कवयित्री डॉ.सविता सौरभ , विशिष्ट अतिथि गिरीश पांडेय काशिकेय तथा अध्यक्षता प्रियदर्शी अशोक सिंह मौर्य ने की

अतिथियों द्वारा शहीदों को श्रद्धासुमन अर्पण और दीप प्रज्ज्वलन के उपरांत संस्था की संस्थापक स्मृतिशेष चंद्रावती नरेश के चित्र पर पुष्पार्पण करके आसु कवि डॉ. छोटेलाल सिंह मनमीत द्वारा माँ भारती वंदना से कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ I

राष्ट्रीय अध्यक्ष इंजीनियर राम नरेश “नरेश” और संस्था के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष दीपक दबंग ने अध्यक्ष, मुख्य अतिथि,विशिष्ट अतिथि और सभी कवियों/कवयित्रियों को अंगवस्त्र,स्मृति चिन्ह और पुस्तक देकर सम्मानित किया I

देश भक्ति से ओत – प्रोत गीत गज़लों के दौरान प्रसिद्ध गज़लकार व “साहित्य की डोर पूरब की ओर” संस्था के संस्थापक गोपाल केशरी और उनकी टीम को चंद्रा साहित्य गौरव सम्मान तथा भोजपुरी गीतों के बादशाह राम नरेश पाल को उत्कृष्ट छंद लेखन- पाठन, श्री दिनेश दत्त पाठक को उनके चर्चित दोहों और मो. वाहिद इकबाल बनारसी को देश भक्ति के लिए मुक्तक और गज़ल के लिए चंद्रा साहित्य परिषद (ट्रस्ट) द्वारा अंगवस्त्र, प्रशस्ति पत्र और पुस्तकें देकर सम्मानित किया गया I

संस्था के राष्ट्रीय अध्यक्ष राम नरेश “नरेश” द्वारा स्वागत संबोधन के बाद मुख्य अतिथि डॉ. सविता सौरभ जी ने चंद्रा साहित्य परिषद (ट्रस्ट) से सम्मानित होने वाले कवियों को बधाई देते हुए कहा कि,संस्था द्वारा छोटे -बड़े सभी साहित्यकारों को सम्मानित करने की इस परंपरा से निश्चित ही नव रचनाकारों को बनारस में एक समृद्ध व सशक्त साहित्यिक मंच मिला है I

संस्था के महासचिव सुप्रसिद्ध युवा कवि और मंच संचालक नाथ सोनांचली जी के ओजस्वी और संगीतमय साहित्यिक संचालन में “एक शाम शहीदों के नाम” काव्य गोष्ठी में कवयित्री डॉ. सविता सौरभ के सुमधुर गीतों के साथ गिरीश पांडेय काशिकेय, नाथ सोनांचली, राम नरेश पाल- माटी पर ठाढ़ हिमालय सा गिरि माटी क, मान बढ़ावत माटी क, डॉ.छोटेलाल सिंह मनमीत – कसम है इस तिरंगे की लहू कुर्वान कर देंगे, गोपाल केशरी- ऐ जश्न- ए तिरंगा लहरा रहा है, मो. वाहिद इकबाल बनारसी- जो गुलशने वतन को जला डाले दोस्तों, ऐसा न कोई मुल्क का गद्दार चाहिए, दिनेश दत्त पाठक, प्रियदर्शी अशोक सिंह मौर्य, राम नरेश “नरेश”-गोरवन के बढ़ल अत्याचार हो, पलटनियां लेइके चल चली बलमू, नंद गोपाल नंदू और काशिका में हास्य व्यंग विधा के महारथी दीपक दबंग के देश भक्ति की कविता -मुखाग्नि के लिए नन्हा से कर है, से काव्य गोष्ठी को शीर्षता प्रदान की गई I

प्रियदर्शी अशोक सिंह मौर्य के अध्यक्षीय संबोधन और राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी डॉ. कैलाश सिंह विकास के धन्यवाद ज्ञापन के बाद कार्यक्रम का समापन हुआ I

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