
वाराणसी। विगत वर्षों की भांति इस वर्ष भी सावन मास के पूर्णिमा के अवसर पर काशी खंडोक्त प्राचीन श्री मध्यमेश्वर महादेव जी का भव्य वार्षिक श्रृंगार का आयोजन किया गया।
इस अवसर पर बाबा के भक्तों एवं श्रंदालुओं ने बताया कि प्रतिवर्ष की भांति पूर्णिमा पर बाबा का भव्य श्रृंगार और भजन-कीर्तन होता रहा।
मंदिर परिसर को फूल- मालाओं, विद्युत छालरों से सुंदर सजावट की गई थी।
बाबा मध्यमेश्वर महादेव तथा अन्य विग्रहों का बेला, गुलाब, जूही आदि सुगंधित पुष्प-मालाओं से भव्य श्रृंगार के बाद विभिन्न प्रकार के मिष्ठान एवं फलों का भोग लगाकर महाआरती हुई।
गायको एवं स्थानीय भक्तगणों द्वारा संगीतमय भजन- कीर्तन के बाद श्रद्धालुओं मे प्रसाद वितरण हुआ। बुजुर्गों ने बताया कि बाबा मध्यमेश्वर महादेव ही काशीदेव के नाभी स्थल है. इनकी उपासना से भक्तों को योग की प्राप्ति होती है। बाबा ने ही हठ योग की सिद्धी योगी गोरखनाथ को प्रदान की थी। काशी के मध्य में स्थित यह अति प्राचीन स्वयंभू लिंग का वर्णन शिव महापुराण तथा अन्य अनेकों धर्म ग्रंथो में मिलता है।
धर्म ग्रंथो के रचयिता वेदव्यास जी इसी स्थान पर रहकर बाबा की साथना किया और महादेव की कृपा प्राप्ति से मंदिर परिसर में ही महाभारत ग्रंथ की रचना की थी। महाराजा विक्रमादित्य द्वारा इस मंदिर का निर्माण किया गया था। समय-समय पर इस मंदिर का निर्माण अन्य लोगों द्वारा भी होता रहा है।
भारत में मध्यमेश्वर महादेव का एक मंदिर हिमाचल प्रदेश में है तथा दूसरा काशी में है। काशी मे मध्यमेश्वर महादेव लिंग की दिव्यता के कारण ही भक्तो के दिलों मे बाबा के प्रति एक विशेष स्थान है। इस अवसर पर द्वारका सरदार, धन्नु सरदार, मन्नू यादव, शिवाजी यादव, अखिलेश चौबे, मुन्ना यादव, आनंद सिंह अन्ना, विक्की यादव, भैया लाल सेठ, पप्पू यादव सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं स्थानीय भक्तगण मौजूद रहे।

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