बरसात धान की फसल के लिए प्रकृति का अच्छा उपहार है:-जिला कृषि अधिकारी

 

वाराणसी। जिला कृषि अधिकारी संगम सिंह ने किसानों को जानकारी देते हुए बताया कि वर्तमान अगस्त माह में 27 तारीख तक कुल 408.97 मिमी वर्षा हुई है, जो विगत 10 वर्षों में अगस्त माह में जो वर्षा हुई है, उसके सापेक्ष सबसे अधिक वर्षा है। धान की फसल के लिए प्रकृति का अच्छा उपहार है। इसमें हमें सजग रहने की भी आवश्यकता है। आवश्यकता से अधिक यूरिया के प्रयोग से बचना है।

जिन किसानों द्वारा दूसरी बार टाप ड्रेसिंग न किया गया हो, यदि खेत में ज्यादा पानी लगा हो तो जल निकासी करते हुए यूरिया की टाप ड्रेसिंग करें। मार्केट में मोटे दाने की यूरिया उपलब्ध है, उसका प्रयोग करें। इसमें भी 46 प्रतिशत नाइट्रोजन होता है। यह मिट्टी में धीरे-धीरे घुलता है, जिससे पौधों को लम्बे समय तक लगातार नाइट्रोजन मिलती रहती है। इस लिए यह पौधों के लिए ज्यादा उपयोगी होगा। इसी के साथ यह भी अवगत कराना है कि आवश्यता से अधिक यूरिया का प्रयोग कदापि न करें। अधिक यूरिया के प्रयोग से पौधों की वानस्पतिक वृद्धि ज्यादा होती है। पत्तियां और तना मुलायम हो जाते है, जिसके कारण कीट रोग का प्रकोप होने की सम्भावना बढ़ जाती है। कृषि रक्षा अधिकारी श्री बृजेश विश्वकर्मा जी द्वारा अवगत कराया गया है कि धान की फसल में जड़ की सूड़ी या दीमक का प्रकोप हो तो इसके नियंत्रण के लिए क्लोरपाइरीफास 20 प्रतिशत ई0सी0 की 2.5 लीटर मात्रा प्रति हेक्टेयर की दर से सिंचाई के पानी के साथ प्रयोग करें तथा तना बेधक एवम् पत्ती लपेटक कीट के नियंत्रण हेतु क्लोरपाइरीफास 20 प्रतिशत ई0सी0 या क्यूनालफास 25 प्रतिशत ई0सी0 की 1.50 लीटर मात्रा को 500 से 600 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *