वेद और उपनिषद भारतीय ज्ञान परंपरा के मूल स्रोत : – प्रो. धर्मदत्त चतुर्वेदी

 

वाराणसी। डॉ. घनश्याम सिंह महाविद्यालय, सोएपुर, लालपुर में भारतीय ज्ञान परंपरा के प्रति विद्यार्थियों में जागरूकता एवं रुचि विकसित करने के उद्देश्य से “भारतीय ज्ञान के प्रमुख स्रोत—वेद एवं उपनिषद्” विषय पर विशेष अतिथि व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम संस्कृत विभाग एवं भारतीय ज्ञान परंपरा समिति के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित हुआ।

कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. आनंद सिंह ने की। मुख्य वक्ता केंद्रीय उच्च तिब्बती शिक्षा संस्थान, सारनाथ के संस्कृत विभाग के प्रो. धर्मदत्त चतुर्वेदी ने वेद एवं उपनिषदों के महत्व, उनके दार्शनिक चिंतन, जीवन-मूल्यों और वर्तमान शैक्षिक संदर्भों में उपयोगिता पर विस्तार से विचार रखे।

प्रो. चतुर्वेदी ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा केवल प्राचीन ज्ञान का संग्रह नहीं है, बल्कि यह व्यक्ति के समग्र विकास, आत्मचिंतन, नैतिकता और जीवन-दृष्टि को दिशा देने वाली समृद्ध परंपरा है। उन्होंने विद्यार्थियों से वेद एवं उपनिषदों में निहित ज्ञान को आधुनिक संदर्भों से जोड़कर समझने का आह्वान किया।

कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों के साथ प्रश्नोत्तर एवं संवाद सत्र भी आयोजित किया गया। कार्यक्रम के सफल आयोजन में भारतीय ज्ञान परंपरा समिति के सदस्य ईश्वर मौर्या का विशेष सहयोग रहा। संयोजन श्रीमती अंकिता यादव ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन संस्कृत विभागाध्यक्ष डॉ. विपुल कुमार शुक्ला ने दिया।

इस अवसर पर डॉ. प्रीति शाह, डॉ. ईसीता मिश्रा, डॉ. गंभीर सिंह, डॉ. अरविंद कुमार चौबे, रितेश सिंह, अरविंद कुमार सिंह सहित महाविद्यालय के शिक्षक एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।

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