तर्क के उस्ताद थे डॉ. नामवर सिंह, एक ही कवि को दोनों पक्षों से सिद्ध कर सकते थे:- प्रो. अवधेश प्रधान

 

वाराणसी। उदय प्रताप कॉलेज के हिंदी विभाग के तत्वावधान में प्रसिद्ध आलोचक डॉ. नामवर सिंह की जन्मशती पर ‘डॉ. नामवर सिंह: हिंदी आलोचना का संवादी स्वर’ विषयक राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन हुआ।

संगोष्ठी के समाहार सत्र में प्रख्यात आलोचक प्रो. अवधेश प्रधान ने कहा कि नामवर जी तर्क के उस्ताद और अंतर्विरोधों से युक्त व्यक्तित्व थे, जो एक ही कवि को दोनों रूपों में अकाट्य ढंग से सिद्ध कर सकते थे। वरिष्ठ कवि नरेश सक्सेना ने उनके विराट अध्ययन को रेखांकित किया। सत्र संचालन रवि शंकर सोनकर व आभार डॉ. रमेश प्रताप सिंह ने जताया।

प्रथम सत्र ‘काव्य चिंतन की अन्तर्ध्वनियां’ की अध्यक्षता प्रो. श्रीप्रकाश शुक्ल ने की और कहा कि नामवर जी को उनकी परंपरा की समझ ने बनाया। सत्र में प्रो. अरविंद त्रिपाठी, जनकवि शिवकुमार ‘पराग’ और प्रो. कमलेश शर्मा ने भी विचार रखे। संचालन डॉ. विवेक सिंह व आभार डॉ. अरविंद सिंह ने व्यक्त किया।

द्वितीय सत्र ‘इतिहास और परम्परा का आख्यान’ में अध्यक्षीय वक्तव्य देते हुए प्रो. संजीव कुमार ने नामवर जी को जीवंत आलोचना शक्ति बताया। प्रो. रघुवंशमणि व प्रो. सूरज बहादुर थापा ने भी संबोधित किया। संचालन डॉ. महेंद्र प्रसाद कुशवाहा एवं आभार प्रो. सुधीर राय ने व्यक्त किया।

आरंभिक शोध पत्र सत्र की अध्यक्षता प्रो. अनिता सिंह व डॉ. प्रवीण कुमार यादव ने की, संचालन डॉ. विकास सिंह एवं आभार डॉ. पूनम सिंह ने किया।

संगोष्ठी में यूपी कालेज के पूर्व हिन्दी विभागाध्यक्ष डॉ. रासुधार सिंह, मदन कश्यप, प्रो. तरुण कुमार, श्री भालचंद्र जोशी, प्रो. अरविंद त्रिपाठी, प्रो. धर्मेंद्र कुमार सिंह, डॉ. गया सिंह, प्रो. शशिकांत द्विवेदी, श्री अजय राय, प्रो. रमेश धर द्विवेदी, डॉ. विंध्याचल यादव, डॉ. प्रदीप कुमार सिंह, प्रो. प्रकाश उदय, प्रो. मनोज प्रकाश त्रिपाठी, प्रो. देवेंद्र कुमार सिंह, प्रो. पंकज कुमार सिंह, डॉ. आनंद राघव चौबे, डॉ. चंद्रशेखर सिंह, डॉ. अनुराग उपाध्याय, डॉ. देवेश चंद्र, डॉ. नवीन कुमार यादव, डॉ. विजय कुमार सिंह, डॉ. विनोद पाल, डॉ. सतीश प्रताप सिंह, डॉ. अनिरुद्ध चौधरी तथा डॉ. विनीत राय आदि थे।

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