
नव्या दुबे विज्ञान छात्रा
वाराणसी।आज जो तापमान दिनांक 9 जून का जो दिखा है उसमें वाराणसी 45 ,गोरखपुर 44,दिल्ली 42 और प्रयाग राज 37 डिग्री सेंटीग्रेड बताया गया है। आजही बनारस के एक समाचार पत्र में कुछ लोगों को 11नदियाँ भी दिखी हैं जिनका उन्होंने उल्लेख भी किया है किन्तु बनारस के लोग गवाह होने की धरातल पर तो कुछ ही दिख रही हैं जिनका विवरण और दुर्दशा ग्रस्त स्थिति का जिक्र करना भी जरुरी है जो हम आगे करेंगे। आज जब दुनिया विज्ञान को सर्वोपरि मान रहा है, उस समय यथार्थ परक होना ही कल्याणकारी होगा । हवा में रहने से कोई बात बनती नहीं।जहां 22 नदियों की बात कही जा रही है वही पर ड्रोन के कुछ फोटो भी दिए जा सकते थे।
अब हम अन्य स्थानों की बात यदि छोड़ भी देते हैं तो वाराणसी जो नदियों का क्षेत्र है जिसमे उत्तर में गोमती नदी हैं, उसके दक्षिण नाद नदी है और दक्षिण चलें तो वरुणा जो काशी को वाराणसी की पहचान देती है और शहर के दक्षिण चलें तो अस्सी नदी है।इतनी नदियों से घिरी और पूरित होती काशी में यह देखा जा सकता है कि सर्वाधिक तापमान 45 डिग्री का मिला है वहीँ मात्र 120 किलोमीटर दूर स्थित प्रयागराज का तापमान 37 डिग्री है। यह अत्यधिक तापमान जो वाराणसी में मिल रहा है वह इस बात पर शोध करने के लिए बाध्यकारी है कि इतना अधिक अंतर क्यो?
कहने को तो वाराणसी में 5 विश्वविद्यालय है एक दर्जन से अधिक पोस्ट ग्रेजुएट महाविद्यालय है। भारी संख्या में इंजीनियरिंग कालेज है किन्तु इनमें उपलब्ध विद्वानों को इस तापमान की वजह पर शोध में रुचि नहीं जो अवश्य ही चिंतनीय है। प्रतिदिन समाचारों में तमाम बीमारों के भीड़ का जिक्र मिलता है और अनुपयोगी विषयों को पढ़कर अफसर बने राज्य कर्मचारियों को भी इस विषय पर शासन को चिंतन के लिए प्रेरित करने का कोई प्रयास नहीं दीखता है।
अस्तु,इस विषय पर एक विज्ञानं छात्रा होने के नाते हम बिन्दुवार चर्चा करेंगे कि इतना भयानक तापमान होने के कारण क्या ।
1-उपरोक्त वर्णित नदियों और जलस्रोतों की क्या दशा है और उनके जल संग्रह पर ग्रहण क्यों है ,उनके आसपास के तालाब कूप, जल प्रवाह के मार्गों पर अतिक्रमण क्यों,कैसे ? उस इलाके के पटवारी ,तहसीलदार और जिलाधिकारी से जबाब तलब होना चाहिए और ड्यूटी की उपेक्षा के बिंदुपर दण्डित किया जाना जरुरी है। तमाम मंत्रीगण रोज वाराणसी तफरीह करने के लिए पुरे प्रदेश से आते तो हैं किन्तु उन्हें यहाँ की दुर्दशा क्यों नहीं दिखी यह एक गंभीर प्रश्न है।
2 – वाराणसी में जिधर भी देखिये ऊँची ऊँची बिल्डिंगे खूब दिखती हैं किन्तु कहीं भी एक भी वृक्ष नहीं दीखता है।विकास प्राधिकरण और उसके प्रमुख अधिकारी नए निर्माणों पर तबतक के लिये रोक दिए जाने चाहिंए जबतक मकान के आसपास वृक्ष न लग जाएँ. क्या यह संभव नहीं? प्रश्न यह है कि वह ऐसा करे क्यों जबकि बादशाह को इन समस्याओं से कोई फर्क नहीं।
3 – अगली समस्या है वाराणसी में जिस भी मकान को देखिये उसपर सोलर पैनल लगा दीखता है।सोलर पैनल से क्या तापमान नहीं बढ़ता है इस पर प्रशासन को कितनी जानकारी है ?यदि है तो क्या ,और यदि नहीं है तो क्यों?
विज्ञान की दृष्टि से सूर्य के प्रकाश से फोटोइलेक्ट्रिक इफेक्ट से बिजली तो बनेगी किन्तु उसी के साथ और भी कुछ होगा या नहीं इस पर कोई विचार क्यों नहीं।
सूर्य का जो पूर्ण प्रकाश होता है यदि उसको विश्लेषित कर (प्रिज्म के माध्यम) से देखा जाय तो उसमे रश्मियों का क्रम इस प्रकार होता है । वायलेट ,इंडिगो,ब्लू,ग्रीन,येलो और रेड . अब जो थोडा भी विज्ञान समझते हैं वह समझ लेंगे कि वायलेट और उससे पहले अल्ट्रा वायलेट तो फोटेलेक्ट्रोंन निकालकर बिजली बनाएगी किन्तु दूसरी और की उर्जा जो रेड और हीट वेव है वह कहाँ जाएगी।अतः यह हीट तो वायुमंडल में निकल कर हमें ही मिलेगी।यह भी एक प्रमुख कारण तापमान बढ़ने का है।
तो अब हम इस समीकरण पर पंहुच चुके है कि नदियों में जल नहीं,तालाब सूखे और जल स्रोत गायब वृक्ष काटकर सड़क और मकान और ऊँची बिल्डिंग बिना समझे बुझे सोलर अनगिनत ए सी
सटे सटे मकान जहा हवा भी पास न हो सके।
तो गर्मी बढ़ेगी ही. और आज दिनांक 10 जून को और भी वृद्धि होगी। हमे तैयार रहना होगा।
