वाराणसी ।भारत की हिंदी पत्रकारिता में उत्तर प्रदेश, बिहार एवं झारखंड में पिछले पाँच दशकों से उल्लेखनीय योगदान करने वाले आज हिंदी दैनिक के स्थानीय सम्पादक काशी के मूर्धन्य पत्रकार 85 वर्षीय चक्रवर्ती गणपति नावड जी का लंबी बीमारी के बाद काशी में गायघाट स्थित आवास में निधन हो गया । श्नीनावड पिछले कुछ दिनों से गम्भीर बिमारियों से अस्वस्थ चल रहे थे।

भारत की हिंदी पत्रकारिता में जिन अहिंदीभाषी पत्रकारों का बहुमूल्य योगदान रहा है उनमें पं. बाबूराव विष्णु पराडकर, स्व. लक्ष्मण नारायण गर्दे, स्व. रामचंद्र नरहरि बापट, स्व. विद्या भास्कर की गौरवशाली परंपरा के संवाहक यशस्वी पत्रकार श्री चक्रवर्ती गणपति नावड का नाम वर्तमान में शीर्ष पर है। पत्रकारिता में एक संत की भाँति जीवन की तमाम विसंगतियों एवं झंझावातो को झेलते हुए कबीर की तरह फक्कड़ जीवन जीने वाले श्री नावड 85 वर्ष की अवस्था में हिंदी पत्रकारिता में एक ऋषि पत्रकार के रूप में वेद वाक्य अहर्निश सेवामहे को चरितार्थ कर रहे हैं।एक पैर से द्विव्यांग होने के बावजूद श्री नावड ने अपनी अदम्य इच्छा शक्ति,कठिन परिश्रम,त्याग एवं कर्तव्य परायणता के बल पर लगभग 5 दशक से अधिक समय से बिहार,झारखंड एवं उत्तर प्रदेश की हिंदी पत्रकारिता के क्षेत्र मे असाधारण कार्य करते हुये बहुमुल्य योगदान किया है।

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