
वाराणसी।लाल बहादुर शास्त्री स्मृति भवन डायमंड नगर वाराणसी और पुरातत्व संग्रहालय, सामाजिक विज्ञान विभाग, सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय वाराणसी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित पांच दिवसीय कला अभिरुचि पाठ्यक्रम कार्यशाला के अन्तर्गत “काशी का इतिहास, सांस्कृतिक परंपरा की महत्ता एवं उपयोगिता” विषयक व्याख्यान कार्यशाला के चतुर्थ दिवस के प्रथम सत्र में डॉ० सर्वेश कुमार ने सारनाथ की बौद्ध कलाकृतियों पर विस्तार से प्रकाश डाला।
डॉ० सर्वेश कुमार ने कनिधम से लेकर वर्तमान तक के उत्खननों से प्राप्त पुरातात्विक कलाकृतियों पर चर्चा की, जिसमें मौर्यकाल से लेकर गढ़वाल काल तक के कलात्मक विकास पर विस्तार से प्रकाश डाला गया।
दूसरे सत्र में डॉ० विमल कुमार त्रिपाठी ने प्रतिभागियों को पाषाण मूर्तियों के निवारक एवं उपचारात्मक उपचार की विधियों एवं सावधानियों के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने पाषाण मूर्तियों के उपचारात्मक उपचार के बारे में प्रायोगिक तौर पर भी बताया।
