काशी: एक जीवंत संग्रहालय–कुलपति 

 

पांच दिवसीय कार्यशाला का समापन 

वाराणसी।काशी विश्व की पुरातन संस्कृति साहित्य, कला, धर्म, पर्यटन, खान-पान, संत परम्परा एवं भौगोलिक परिदृश्य आदि है। काशी अपने आप में एक संग्रहालय है। उक्त विचार रविवार को सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय के योग साधना केन्द्र में संस्कृति विभाग उत्तर प्रदेश, लाल बहादुर शास्त्री स्मृति भवन संग्रहालय, रामनगर एवं विश्वविद्यालय के पुरातत्व संग्रहालय के संयुक्त तत्वावधान में विश्व संग्रहालय के अवसर पर आयोजित पांच दिवसीय कार्यशाला के प्रमाण पत्र वितरण एवं समापन समारोह के मुख्य अतिथि अब्दुल कलाम तकनीकी विश्वविद्यालय,लखनऊ के पूर्व कुलपति प्रो. प्रदीप कुमार मिश्र ने व्यक्त किया।

उन्होंने संग्रहालय के उ‌द्देश्य पर चर्चा करते हुये कहा कि संग्रहालय का उद्देश्य शिक्षा देना होता है जिसमें हम भूत काल से सीखकर वर्तमान में सुधार कर सकते है।

उन्होंने काशी की शिक्षा, विज्ञान, पर्यावरण, साहित्य व संगीत आदि के अलग-अलग संग्रहालयों के निर्माण पर जोर देते हुये कहा कि संग्रहालय का निर्माण जनता के लिये ज्ञान नवाचार को ध्यान में रखकर करना होगा।

विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो बिहारी लाल शर्मा ने अध्यक्षीय उद्बोधन करते हुए कहा कि जहाँ तक काशी की बात है, यह नगर स्वयं में एक जीवंत और गतिशील संग्रहालय है। इसकी गलियाँ, मंदिर, शिलालेख, स्थापत्य, लोक कला, संगीत, नृत्य, परंपराएँ और यहाँ तक कि जन-जीवन की शैली – सब कुछ ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक मूल्य से भरे हुए हैं।

उन्होंने कहा कि आज के दिन (18 मई)विश्व संग्रहालय दिवस है इसकी शुरुआत 1983 में हुई थी जब संयुक्त राष्ट्र संघ के संग्रहालयों की विशेषता एवं उनके महत्व को समझते हुये इस दिन को विशेष दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया इसका उद्देश्य लोगों में संग्रहालयों के प्रति जागरूकता फैलाना और उन्हें अपने इतिहास के बारे में जानने के लिये प्रेरित करना है। संग्रहालयों के माध्यम से वहां के विरासत की सम्पूर्ण जानकारी दी जाती है।

संग्रहालय हमारी सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने और उसे आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का एक बहुत बड़ा माध्यम है इसके साथ ही हमने अपने जडों से जुड़ने और अपने अतीत को जानने में मददगार होती है।

कुलपति प्रो शर्मा ने इस अवसर पर उन्होंने कार्यशाला में प्रतिभाग कर रहे प्रतिभागियों को विश्व संग्रहालय दिवस की शुभकामनायें देते हुये कहा कि काशी की सम्पूर्ण दर्शन एक संग्रहालय है जो काशी की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को दर्शाती है।

कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि समाजिक विज्ञान के विभागाध्यक्ष प्रो० शैलेश कुमार मिश्र ने स्वागत भाषण कर आगंतुक अतिथियों का स्वागत किया।

कार्यक्रम में 45 प्रतिभागियों को मुख्य अतिथि एवं अध्यक्ष द्वारा प्रमाण पत्र वितरित किया गया।

कार्यक्रम में शामिल आंगतुक अतिथियों को अमित कुमार द्विवेदी, संग्रहलायाध्यक्ष के द्वारा स्मृति चिन्ह अंगवस्त्रम एवं माल्यार्पण कर स्वागत किया गया।

कार्यक्रम का शुभारम्भ मंगलाचरण एवं अतिथियों द्वारा मों सरस्वती के चित्र पर मार्त्यापण कर किया गया।

कार्यक्रम का संचालन डॉ० सुजीत कुमार चौबे एवं धन्यवाद ज्ञापन संग्रालयाध्यक्ष डॉ० विमल कुमार त्रिपाठी ने किया।

इस अवसर पर प्रो राजनाथ, प्रो महेन्द्र कुमार पाण्डेय, प्रो हीरक कांति चक्रवर्ती, अमित कुमार द्विवेदी सहित विश्वविद्यालय के छात्र व छात्रायें उपस्थित थे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *