संत कृष्ण कुमार दास की स्मृति में शास्त्रार्थ श्रद्धांजलि सभा श्री द्वारकाधीश मंदिर, देवरहवा बाबा आश्रम हुआ आयोजन

वाराणसी ।काशी के मूर्धन्य विद्वान एवं संत कृष्ण कुमार दास (त्यागी) जी के वैकुंठ वास के उपरांत रविवार को अस्सी घाट स्थित द्वारकाधीश मंदिर (देवरहवा आश्रम) में त्रयोदशी शास्त्रार्थ साथ सभा के तत्वाधान में श्रद्धांजलि एवं शास्त्रार्थ-सभा का आयोजन किया गया। आयोजन की अध्यक्षता करते हुए काशी विद्वत परिषद के अध्यक्ष पद्मभूषण प्रो वशिष्ठ त्रिपाठी ने कहा कि श्रीकृष्ण कुमार दास जी जैसे परंपरागत संस्कृत के विद्वान का जाना संस्कृत जगत के लिए बहुत बड़ी क्षति है।

इसी क्रम में काशी हिंदू विश्वविद्यालय के व्याकरण विभाग के प्रोफेसर श्रीशैलेश कुमार तिवारी एवं वेद विभाग के सहायक आचार्य नारायण प्रसाद भट्टाराई जी ने व्याकरण और न्याय शास्त्र के प्रति त्यागी जी के विशिष्ट लगाव का बखान प्रस्तुत किया।

सभा का संयोजन एवं विद्वानों का स्वागत करते हुए संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में व्याकरण विभाग के सहायक-आचार्य विद्यावाचस्पति ‘श्री दिव्य चेतन ब्रह्मचारी जी’ ने उनके शास्त्र के प्रति प्रतिबद्धता एवं दिव्य संत-जीवन का सार प्रस्तुत किया।

शोध-छात्र रामनिवास शर्मा ने तुलसीदास जी के पंक्तियों से त्यागी जी के प्रति श्रद्धांजलि अर्पित की।

संचालन संत कृष्ण कुमार दास के शिष्य प्रेम नारायण दास ने अतिथियों का स्वागत द्वारकाधीश मंदिर देवरहवा बाबा आश्रम के राम अखंड दास महाराज एवं नारायण दास महाराज ने किया।

इसी क्रम में व्याकरण,न्याय, वेदांत आदि विविध शास्त्रों में हर्ष त्रिपाठी, राम प्रसाद शुक्ल, शिवराम दास, रामप्रपन्नाचार्य, विशाल भारद्वाज आराध्या शुक्ल,अदिति आदि 50 सुधी छात्र- छात्रों के द्वारा वाक्यार्थ-पुष्पांजलि अर्पित की गई। नौ वर्ष की छोटी सी एवं दो बार राष्ट्रीय स्तर पर स्वर्ण पदक प्राप्त करने वाली बालिका वसुधा भट्टराई ने अमरकोश पाठ, गीता पाठ एवं पाणिनीय-अष्टाध्यायी के सूत्रों का पाठ कर सब का मन मोह लिया।

इस अवसर पर इस मठ के पुजारी प्रेमदास सहित सैकड़ो संत उपस्थित रहे।

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