
वाराणसी।वाराणसी के सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय और अंतर विश्वविद्यालय अध्यापक शिक्षा केंद्र (आईयूसीटीई), बीएचयू के बीच एक पूर्व में हुये महत्वपूर्ण समझौता के अन्तर्गत आज आईयूसीटीई के निदेशक प्रो प्रेम नारायण सिंह ने सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो बिहारी लाल शर्मा को प्रेषित पत्र के माध्यम से अनुरोध किया है कि वह उन्हें(संस्था) अपने शोध केंद्र के रूप में मान्यता दे। यह अनुरोध दोनों संस्थाओं के बीच पूर्व में हुए समझौते के अंतर्गत आया है, जिसमें सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो बिहारी लाल शर्मा और आईयूसीटीई, बीएचयू के निदेशक प्रो प्रेम नारायण सिंह ने अनुसंधान और शैक्षिक आदान-प्रदान के क्षेत्र में सहयोग करने के लिए सहमति व्यक्त की थी।
आज इस आशय का पत्र प्राप्त कर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो बिहारी लाल शर्मा ने बताया कि..
*आईयूसीटीई की पृष्ठभूमि*–
आईयूसीटीई एक स्वायत्त संस्थान है जो विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के अधीन कार्य करता है। इसका उद्देश्य शिक्षक शिक्षा संस्थानों को अकादमिक और पेशेवर कार्यक्रम और सेवाएं प्रदान करना है।
*समझौते के उद्देश्य*–
इस समझौते के माध्यम से, आईयूसीटीई और सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय अनुसंधान और शैक्षिक आदान-प्रदान के क्षेत्र में सहयोग करने के लिए सहमत हुए हैं। आईयूसीटीई का उद्देश्य पीएचडी कार्यक्रम शुरू करना है और इसके लिए उन्हें सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय के तहत एक शोध केंद्र के रूप में मान्यता प्राप्त करना आवश्यक है।
*राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के साथ संरेखण*–
यह समझौता राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के लक्ष्यों को साकार करने की दिशा में एक प्रगतिशील कदम होगा। इससे स्वदेशी ज्ञान प्रणालियों और समकालीन शैक्षणिक अनुसंधान के एकीकरण के माध्यम से शिक्षक शिक्षा को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।
*भविष्य की संभावनाएं*–
इस समझौते से सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय और आईयूसीटीई दोनों को लाभ होगा। इससे शैक्षिक अध्ययन के क्षेत्र में सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय की पहुंच बढ़ेगी और आईयूसीटीई को राष्ट्रीय उत्कृष्टता संस्थान के रूप में विकसित होने के लिए एक मजबूत शैक्षणिक मंच मिलेगा।
