वाराणसी ।काशी के रामघाट स्थित सुप्रसिद्ध सांड्गवेद विद्यालय में विद्यालय के पूर्व संचालक श्री गिरधारी लाल मेहता जी की स्मृति सभा एवं स्वर्गीय सौ राधाबाई गणोरकर महोदया की स्मृति में वेद घोष एवं विद्वत सभा संपन्न हुई ।

कार्यक्रम के प्रारंभ में चारों वेदों के वैदिक विद्वानों द्वारा वसंत पूजा की गई।

विद्वत सभा की अध्यक्षता ज्योतिषाचार्य पंडित कृष्णगोपाल शर्मा ने की।

इस अवसर पर विद्यालय के अध्यक्ष वेद मूर्ति पंडित विश्वेश्वर शास्त्री द्रविड़ ने श्री गिरधारी लाल मेहता जी के जीवनी पर प्रकाश डालते हुए कहा कि श्री मेहताजी सन 1921 में हुए विद्यालय की स्थापना के प्रत्यक्षदर्शी रहे। दीर्घकाल तक विद्यालय की स्वस्थ परंपरा को कायम रखने में उनका योगदान प्राप्त होता रहा। विद्वत संगति में रहने के कारण उनमें श्रेष्ठ संस्कारों का अभ्युदय हुआ था । नियम व अनुशासन के वे पक्के थे ।समयबद्धता उनकी विशेषता थी। काशी नरेश से भी उनका आत्मीय संबंध था ।उनके ना रहने पर 12 मार्च 1999 को हुए सान्गवेद विद्यालय के 78 में वार्षिकोत्सव के अवसर पर सभापति काशी नरेश जी ने अपने अभिभाषण में विद्यालय एवं श्री मेहता जी के विषय में उद्गार व्यक्त करते हुए कहा था कि यह विद्यालय सबके लिए है। मेहता जी अदम्य उत्साह बनाए रखेंगे हमारे युवराज उन्हे प्रेरणा देते रहेंगे। मुझे मालूम हुआ कि बड़े मेहता जी (श्री गिरधारी लाल जी )अब नहीं है। अब नए लोग आए हैं, नई व्यवस्था चल रही है ।मेरे ना जाने से विद्यालय बंद हो सकता है ।मैंने सोचा कि मेरे रहते विद्यालय बंद होवे या उचित नहीं है। अतः अस्वस्थ होते हुए भी मैं यहां आया। अब आगे आने की स्थिति में नहीं हूं। श्री मेहताजी विद्यालय का संचालन पूर्वजों की भांति करते रहेंगे हमारे युवराज उन्हें प्रेरणा देते रहेंगे।

सभा अध्यक्ष ने कहा कि श्री मेहता जी अत्यंत धर्मनिष्ठ रहे। उनकी कीर्ति हमेशा बनी रहेगी ,जो सभी के लिए प्रेरणादायक और अनुकरणीय है। विद्वत सभा के साथ सभी वैदिकों का सत्कार किया गया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *