परीक्षण विभिन्न चर में महत्वपूर्ण सम्बन्ध होते हैं, कार्यशाला में चौथा दिन

वाराणसी ।अंतर विश्वविद्यालय अध्यापक शिक्षा केंद्र (आईयूसीटीई) में “फ्रॉम डेटा टू इनसाइट्स: स्टैटिस्टिकल एनालिसिस विद फ्री एंड एआई-ड्रिवन टूल्स” विषय पर छह दिवसीय शॉर्ट टर्म कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है।

कार्यशाला के चौथे दिवस के प्रथम सत्र में डॉ. पराग बी. शाह ने “मोर देन टू ग्रुप्स (एएनओवीए): व्हेन एंड हाउ टू यूज़ ” विषय पर प्रायोगिक हैंड्स-ऑन कराया ।

द्वितीय सत्र में उन्होंने “ची-स्क्वेयर टेस्ट्स (एसोसिएशन बिटवीन वैरिएबल्स)” विषय पर व्याख्यान दिया । उन्होंने बताया कि यह परीक्षण विभिन्न चर के बीच संबंध को समझने का एक महत्वपूर्ण उपकरण है। वक्ता ने कहा कि इस पद्धति से शोधकर्ताओं को डेटा में छिपे पैटर्न और निर्भरता का पता चलता है।

उन्होंने उदाहरण देते हुए समझाया कि सामाजिक विज्ञान और स्वास्थ्य अनुसंधान में इसका व्यापक उपयोग होता है। कार्यक्रम में उपस्थित छात्रों और शोधकर्ताओं ने इस विषय पर गहरी रुचि दिखाई। उन्होंने निष्कर्ष में कहा कि सही प्रयोग से यह तकनीक निर्णय लेने की प्रक्रिया को अधिक सटीक बना सकती है।

तृतीय सत्र में डॉ. राजू डी. चौधरी ने “कोरिलेशन एनालिसिस इंट्रोडक्शन टू रिग्रेशन ” विषय पर व्याख्यान दिया । उन्होंने बताया कि को-रिलेशन एनालिसिस विभिन्न चर के बीच संबंधों की गहराई को समझने का एक सशक्त उपकरण है। उन्होंने आगे कहा कि रिग्रेशन का परिचय शोधकर्ताओं को भविष्यवाणी और निर्णय लेने की प्रक्रिया में अधिक सटीकता प्रदान करता है। उन्होंने उदाहरणों के माध्यम से समझाया कि अर्थशास्त्र, समाजशास्त्र और स्वास्थ्य अनुसंधान में इन विधियों का व्यापक उपयोग होता है।

अंतिम सत्र में उन्होंने “मल्टिपल रिग्रेशन” विषय पर प्रायोगिक हैंड्स-ऑन कराया।

इस छह दिवसीय कार्यक्रम में महाराष्ट्र, केरल, राजस्थान, हरियाणा, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश, बिहार, दिल्ली, गुजरात, उत्तर प्रदेश सहित 10 राज्यों के 37 से अधिक प्रतिभागियों ने प्रतिभाग किया। संकाय सदस्यों सहित केंद्र के सभी अधिकारी व कर्मचारी उपस्थित रहें। इस कार्यक्रम का संयोजन डॉ. दीप्ति गुप्ता, सहायक प्राध्यापक, आईयूसीटीई तथा सह-संयोजन श्री सी. डी. राणा, सहायक पुस्तकालयाध्यक्ष, आईयूसीटीई कर रहे हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *