
वाराणसी। पावन नगरी काशी में जहाँ गंगा तट की आरती विश्वविख्यात है, वहीं अब वरुणा तट भी आध्यात्मिक ऊर्जा का नया केंद्र बनता जा रहा है। शास्त्री घाट पर प्रतिदिन आयोजित होने वाली वरुणा आरती स्थानीय जनमानस को न केवल धार्मिक आस्था से जोड़ रही है, बल्कि काशी की लुप्त होती सांस्कृतिक परंपराओं को भी फिर से जीवंत कर रही है। इस आरती आयोजन की ज़िम्मेदारी लोक चेतना ने उठाई है। संस्था के अध्यक्ष के.के. उपाध्याय की देखरेख में प्रशिक्षित बटुकों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चारण, दीप प्रज्वलन और शंखध्वनि के साथ आरती का आयोजन किया जा रहा है। इस आध्यात्मिक आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालु और स्थानीय नागरिक प्रतिदिन सम्मिलित हो रहे हैं, जिससे घाट पर एक दिव्य वातावरण का निर्माण होता है। शास्त्री घाट पर होने वाली यह आरती न सिर्फ धार्मिक आस्था का प्रतीक बन रही है, बल्कि पर्यावरण, संस्कृति और सनातन परंपरा के संरक्षण की दिशा में भी एक सार्थक प्रयास है। लोक चेतना का उद्देश्य है कि ठीक गंगा आरती की भांति वरुणा तट को भी आध्यात्मिक पहचान मिले और काशी के दोनों पवित्र नदियों को जनजागरण का माध्यम बनाया जाए। घाट पर आरती के समय जलते दीपों की पंक्तियाँ, मंत्रों की ध्वनि और श्रद्धालुओं की भावभक्ति, सब मिलकर एक अलौकिक अनुभव प्रदान करते हैं।
