
वाराणसी।भारतीय संस्कृति, संस्कार एवं भारतीयता के साथ बौद्ध दर्शन को अंतरर्राष्ट्रीय क्षितिज स्थापित करने के उद्देश्य से सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय वाराणसी के आचार्य डॉ लेखमणि त्रिपाठी ने रूस के आमंत्रण पर अपने व्याख्यान से स्थापित किया।
उक्त विचार संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय वाराणसी के कुलपति प्रो बिहारी लाल शर्मा ने उन्हें रूस से भारत आने कुलपति के कार्यालय में स्वागत और अभिनन्दन करते हुए व्यक्त किया।
विश्वविद्यालय के सहायक प्रोफेसर डॉ. लेख मणि त्रिपाठी ने 20 जून से 2 जुलाई 2025 तक रूस की यात्रा की, जो बौद्ध दर्शन, भारतीय संस्कृति और संस्कृत के अंतरराष्ट्रीय प्रचार-प्रसार के संदर्भ में अत्यंत महत्वपूर्ण सिद्ध हुई।
डॉ. त्रिपाठी ने “बौद्ध दर्शन के ब्रह्मविहार” विषय पर व्याख्यान दिया, जिसमें अष्टांगिक मार्ग और अष्टांग योग पर चर्चा की गई। डॉ. त्रिपाठी ने जापानी और रूसी छात्रों को संस्कृत भाषा में बौद्ध धर्म पर व्याख्यान दिया, जो भारतीय दर्शन और शांति के वैश्विक मूल्यों को प्रस्तुत करने वाला अवसर था। रूसी राजदूत श्री विनय कुमार ने डॉ. त्रिपाठी को 21,000 रूबल नगद और अंगवस्त्र से सम्मानित किया, साथ ही उनके ग्रंथ “महाकरुणाविमर्शः” का विमोचन किया।
डॉ. त्रिपाठी का स्वागत सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में किया गया, जिसमें कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा, कैबिनेट मंत्री श्री रविंद्र जायसवाल,प्रो रमेश प्रसाद, प्रो शैलेश कुमार सहित अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने भाग लिया।
यह यात्रा भारतीय संस्कृति की वैश्विक छवि को सुदृढ़ करने और संस्कृत एवं बौद्ध दर्शन को नए श्रोताओं तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। डॉ. त्रिपाठी की उपलब्धियों और योगदान को देखते हुए, उनके कार्य को और अधिक लोगों तक पहुँचाना आवश्यक है
डॉ. लेख मणि त्रिपाठी की रूस यात्रा ने न केवल भारतीय संस्कृति और बौद्ध दर्शन को वैश्विक स्तर पर प्रस्तुत किया, बल्कि संस्कृत भाषा के महत्व को भी उजागर किया। यह यात्रा डॉ. त्रिपाठी के लिए एक महत्व पूर्ण उपलब्धि है और उनके कार्य को और अधिक लोगों तक पहुँचाने के लिए प्रेरित करती है।
