
देवरहवा बाबा आश्रम में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का कथा में हुआ भव्य आयोजन
वाराणसी। ब्रह्मलीन संत देवरहवा बाबा मुख्य शिष्य 104 वर्षीय स्वामी रामबालक महाराज के सानिध्य में श्रावण माह के कृष्ण पक्ष मेँ असि स्थित द्वारकाधीश मन्दिर (देवरहवा बाबा आश्रम) में चल रहे सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा कि चौथे दिन सोमवार को कथा का अमृतपान कराते हुए भगवताचार्य दिव्य नारायणाचार्य महाराज ने भगवान श्री कृष्ण के जन्मोत्सव की लीला का सुंदर वर्णन किया।
भागवताचार्य ने कृष्ण जन्मोत्सव की कथा का वर्णन करते हुए कहा कि देवकी और वासुदेव भगवान कृष्ण के भक्त थे और अत्याचारी कंस उन पर अत्याचार पर अत्याचार कर रहा था। वासुदेव और देवकी को कंस के अत्याचार से मुक्त करने के लिए भगवान ने धरती पर जन्म लिया और कंस का वध करके वासुदेव और देवकी को मुक्त किया।
भागवताचार्य ने कहा मथुरा के जेल में भगवान का जन्म हुआ वासुदेव ने उनको यमुना पार करके वृंदावन में बाबा नंद के घर छोड़ आए। सुबह जब मां यशोदा के पास बालक के रोने की आवाज आई तो सभी ग्रामवासी खुशियां मनाने लगे की नंद बाबा के घर पुत्र की पुत्र का जन्म हुआ है। और और सभी लोग खुशी में नंद के आनंद भयो जय कन्हैया लाल की । बाबा नंद और मां यशोदा खुशी के मारे नाचने के गाने लगे पूरा ब्रजमंडल खुशियां मनाने लगा । भगवान की लीला भी भी अपरंपार है वह अपने भक्त का दुख देख नहीं पाते हैं और उसकी रक्षा के लिए मानव का रूप धरकर धरती पर अवतरित होते हैं और अत्याचारियों का वध करते हैं । चौथे दिन रविवार को भगवान कृष्ण कृष्ण का जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया गया कथा सुनाने आए भक्त खूब नाचे गए और जय कन्हैया लाल की, नंद के आनंद भयो जय कन्हैया लाल की जय घोष करने लगे। पूरा आश्रम कृष्णमय हो गया था। साधु संत गृहस्थ सब नृत्य कर रहे थे।
कथा के अंत में जजमान अरविंद त्रिपाठी ने भागवत पोथी की आरती कर भक्तों में प्रसाद का वितरण किया।
इस अवसर पर श्रीमती ममता त्रिपाठी, दिव्यंकर त्रिपाठी, अमित विक्रम त्रिपाठी, कृपा शंकर दुबे, देवेश मोहन दीक्षित, श्रीमती ममता तिवारी, श्रीमती पूनम दीक्षित, रामबालक दास जी, द्वारकाधीश मंदिर के पुजारी अतिंद्र दास जी महाराज, राधेश्याम रामायणी, रामयश मिश्र, संतदास महाराज सहित काफी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।
