रिपोर्ट रामयश मिश्रा 

 

वाराणसी । काशी के कण-कण में भगवान शिव का निवास है, जड़ व चेतन में विराजमान भगवान शिव की नगरी काशी के मुहल्‍ले व गलियों का भी धार्मिक महत्‍व है। काशी के दक्षिण झोर पर मुहल्ला भदैनी है, जहां भद्रेश्‍वर महादेव का मंदिर है, लोर्लाक कुुंड के उत्‍तर छोर पर पावर हाउस के ठीक सामने शिव हनुमान मंदिर परिसर में स्थित भद्रेश्‍वर महादेव मंदिर में विराजमान स्‍वंयभू बाबा भद्रेश्‍वर महादेव सबका कल्‍याण करते है।

शिव हनुमान मंदिर के महंत डॉक्टर स्वर्ण दास महाराज ने बताया कि यह मंदिर स्वयंभू हैं और सबका कल्याण करने वाले है । धर्म सम्राट स्‍वामी करपात्री जी महाराज के शिष्‍य गोलोकवासी स्‍वामी शिवानंद सरस्‍वती द्धारा रचित पुस्‍तक काशी दर्शन में वर्णन मिलता है की आज से तीन सौ वर्ष पहले यह पूरा क्षेत्र घनें जंगलों से घिरा था, लोग इसे भद्रवनी जंगल के नाम से जानते थे, उस समय यहां पर ग्‍वाले गाय चराने आते थे, एक गाय हमेशा एक जगह खड़ी हाेकर अपने थन से दूध गिराती रहती थी, धीरे धीरे यह बात जब चारो तरफ फैलने लगी तो लोगो ने उस जगह की खुदाई की तो उसके नीचे से शिवलिंग निकला और लोगों ने उसकी पूजा अर्चना शुरू कर दी और भद्रवनी जंगल में मिलने के कारण इनका नाम भद्रेश्‍वर महादेव पड़ा। तीन सौ वर्ष से विराजमान भगवान भद्रेश्‍वर नगरवासियों का कल्‍याण कर रहे है।

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