
वाराणसी। ब्रह्मलीन संत देवरहवा बाबा मुख्य शिष्य 104 वर्षीय स्वामी रामबालक महाराज के सानिध्य में श्रावण माह के कृष्ण पक्ष मेँ असि स्थित द्वारकाधीश मन्दिर (देवरहवा बाबा आश्रम) में चल रहे सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा कि पांचवें दिन दिन मंगलवार को कथा का अमृतपान कराते हुए भगवताचार्य दिव्य नारायणाचार्य महाराज ने कहां कि भगवान भक्त के लिए कुछ भी कर सकते हैं। हिरण्यकश्पय जब भक्त प्रहलाद पर अत्याचार पर अत्याचार करने लगा तो भगवान अपने भक्त को हर जगह बचाए और अंत में जब वह प्रहलाद को यह कहकर जान से मारने जा रहा था कि कहां है तुम्हारे भगवान बताओ नहीं तो आज हम तुम्हें जान से मार दूंगा तब भगवान को अपने भक्त प्रहलाद को बचाने के लिए खंभे से प्रकट हुए और हिरण्यकश्पय
को अपने जन्घे पर रखकर वध किया क्योंकि उसको वरदान था कि ना तो वह दिन में मारेगा ना ही वह रात में मरेगा, ना आकाश में मरेगा और ना ही पाताल में मरेगा और ना ही रात को मारेगा और ना दिन में मरेगा । इसलिए भगवान भगवान उसको शाम के समय उस समय न तो दिन था ना ही रात, अपने जन्घे पर रखकर ना तो वहां आकाश था न ही पाताल था। उसे समय उसका वध किया। भगवान अपने भक्त के लिए सब कुछ करने को तैयार रहते हैं बरसते भक्त भगवान को भाव पूर्वक प्रेम और भाव से पुकारे।
भगवतचार्य ने कहा कि श्रावण माह में श्रीमद् भागवत कथा को कहना और सुनना ईस्वर की कृपा से ही मिलता है । आज हम लोग ब्रह्मलीन संत योगीराज देवरहवा बाबा के आश्रम में बैठकर गंगा नदी के किनारे भागवत कथा का वर्णन कर रहे हैं यह किसी पूर्व जन्म के पूर्ण का फल है।
कथा के अंत में जजमान अरविंद त्रिपाठी ने भागवत पोथी की आरती कर भक्तों में प्रसाद का वितरण किया।
इस अवसर पर श्रीमती ममता त्रिपाठी, दिव्यंकर त्रिपाठी, अमित विक्रम त्रिपाठी, कृपा शंकर दुबे, देवेश मोहन दीक्षित, श्रीमती ममता तिवारी, श्रीमती पूनम दीक्षित, रामबालक दास जी, द्वारकाधीश मंदिर के पुजारी अतिंद्र दास जी महाराज, राधेश्याम रामायणी, रामयश मिश्र, संतदास महाराज सहित काफी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।
