
बचपन से समाज को नया आयाम दे रही है
वाराणसी। समाजसेवी श्रीमती राधा सिंह लगभग चालीस वर्षों से समाज सेवा और दिव्यांग जन सेवा एवं उन्हें आत्मनिर्भर बनाने में लगी हुई है।
समाजसेवी राधा सिंह के घर में भी दो दिव्यांग मौजूद होते हुए समाज में बौद्धिक दिव्यांग जनों की सेवा का कार्य बिल्कुल निःशुल्क कर रही है।इस सेवा कार्य में कोई सरकारी गैर- सरकारी फंड नहीं प्राप्त होता है
दिव्यांग जनों को आत्मनिर्भर और स्वावलंबी बनाने के लिए जो खर्च आता है वह स्वयं वहन करती है ।
संस्था स्वावलंबन पैरेंट्स एसोसिएशन से जुड़कर बौद्धिक दिव्यांग जनों को आत्मनिर्भर बनाने के कार्य हेतु बाजार से कच्चा माल ले आना और उससे सामान बनवाना और तैयार सामान को दिव्यांग जनों के साथ जगह-जगह स्टाल लगवा कर, साथ ही अन्य लोगों से सम्पर्क कर दिव्यांग जनो व्दारा उत्पाद सामानों को विक्रय करना ,उस पैसे को दिव्यांग जनों को पारिश्रमिक के रूप में प्रदान करना, और समाज में बौद्धिक दिव्यांग जनों के द्वारा बनाए गए विभिन्न प्रकार के उत्पादों को लोगों में प्रमोट करना ताकि लोग आगे आएं और खरीदे, इनके द्वारा बनाए गए सामान को इन बौद्धिक दिव्यांग जनों के आत्मविश्वास में वृद्धि हो, साथ ही आत्मनिर्भर बनें।राधा सिंह एक रचनाकार हैं ।
अब तक दो हजार छः सौ पैंसठ रचनाएं अलग अलग जगह प्रकाशित हैं।

राधा सिंह समय-समय पर आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को ठंड के मौसम में कंबल वितरण करती रहती है।
आर्थिक रूप से कमजोर कन्याओं को सिलाई मशीन देकर उन्हें रोजगार का अवसर भी प्रदान करती है। कन्याओं के विवाह में ग्रोसरी कपड़े अन्य सामग्री एवं आर्थिक मदद प्रदान करती रहती है।
विभिन्न संस्थाओं के बच्चों को त्योहारों, राष्ट्रीय पर्व के अवसर पर फल, मिष्ठान, स्टेशनरी इत्यादि का वितरण करती रहती हैं।
समाजसेवी राधा सिंह बच्चों के साथ साथ उनके अभिभावकों को भी प्रशिक्षण देकर उनको स्वरोजगार करने के लिए प्रेरित करतीं रहती है।
समाजसेवी राधा सिंह का सेवा समाज दिव्यांगो उनके अभिभावकों का भविष्य उज्जवल बनाने में सहायक हो रहा है। यह सेवा कार्य समाज को नया आयाम देने में सहायक बनता जा रहा है।
