
वाराणसी। काशी की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं में एक खास स्थान रखने वाले अखाड़ों में इस बार नागपंचमी के अवसर पर काकेमल अखाड़ा, पशुपतेश्वर चौक में एक परंपरागत कुश्ती दंगल का आयोजन किया गया। जहां क्षेत्रीय पहलवानों ने अपनी शक्ति और शौर्य का परिचय दिया। काशी के अखाड़ों का इतिहास बहुत पुराना है, और इन अखाड़ों में देसी पहलवानों द्वारा दांव-पेच की शैक्षिक परंपरा भी रही है, जिसमें विदेशी पहलवान भी प्रशिक्षण लेने के लिए आते हैं।
नागपंचमी के दिन काकेमल अखाड़े में विशेष पूजा-अर्चना की गई और फिर कुश्ती प्रतियोगिता का आयोजन हुआ। अखाड़े में दक्षिण मुखी श्री हनुमान जी की पूजा के साथ दंगल शुरू हुआ। इस आयोजन में क्षेत्र के प्रमुख पहलवानों ने अपनी कला का प्रदर्शन किया और दर्शकों को अपनी कुश्ती से मंत्रमुग्ध किया। काकेमल अखाड़े में इस आयोजन का महत्व सिर्फ खेल तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि धार्मिक आस्था का भी जुड़ाव रहा।
*आस्था और शौर्य का संगम*
वाराणसी के प्राचीन अखाड़ों में अब भी कुश्ती को एक धार्मिक अनुष्ठान के रूप में मनाया जाता है। इस परंपरा का पालन करते हुए काकेमल अखाड़े में पहलवानों ने अपनी शक्ति का प्रदर्शन किया। क्षेत्र के प्रमुख पहलवानों में बच्चा लाल यादव, विकास पहलवान, प्रशांत आकाश पहलवान, प्रियेश पहलवान, वंशु पहलवान, बबलू पहलवान, अक्षित पहलवान, सुक्कू, विष्णु के अलावा नवयुवक पहलवान जैसे विवान यादव, अनुराग यादव और वरुण यादव ने भी इस कुश्ती में भाग लिया और अपने दांव-पेच से सभी को चकित किया। इस आयोजन के दौरान अखाड़े के प्रमुख पहलवानों ने युवा पहलवानों को कुश्ती के दांव-पेच सिखाए और पारंपरिक खेलों को जीवित रखने का संकल्प लिया।
