वाराणसी। उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचंद की जयंती की पूर्व संध्या पर प्रेमचंद मार्गदर्शन केंद्र द्वारा तीन दिवसीय प्रेमचंद उत्सव का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य प्रेमचंद के यथार्थवादी साहित्य को जन-जन तक पहुँचाना और नई पीढ़ी को उनके विचारों से जोड़ना था। कार्यक्रम के पहले दिन प्रेमचंद की कालजयी कहानियों को नाट्य रूपांतर में प्रस्तुत किया गया। सेतु संस्था द्वारा प्रेमचंद की मार्मिक कहानी “बुढ़ी काकी” का मंचन किया गया, जिसमें बूढ़ी काकी के रूप में राजलक्ष्मी का मर्मस्पर्शी अभिनय दर्शकों को गहरे प्रभावित किया। लाक्षी मिश्र ने लाडली की भूमिका अदा की और सत्येंद्र यादव ने सूत्रधार की भूमिका निभाई। वहीं, प्रेरणा कला मंच द्वारा प्रस्तुत “ठाकुर का कुआं” नाटक ने सामाजिक सन्देश को प्रभावशाली ढंग से दर्शाया। कार्यक्रम में काफी संख्या में ग्रामीणों, साहित्य प्रेमियों, और स्थानीय विद्यालयों के छात्र-छात्राओं ने भाग लिया। संयोजक राजीव गोंड ने बताया कि अगले दो दिनों में प्रेमचंद की जयंती पर वरिष्ठ साहित्यकार डा. दयानिधि मिश्र द्वारा “दो बैलों की कथा” और डा. मंजरी पाण्डेय द्वारा “सवा सेर गेहूं” का पाठन होगा। इसके अलावा रचनाओं पर आधारित व्याख्यान, नाट्य प्रस्तुतियाँ और संवाद सत्र भी आयोजित किए जाएंगे। इस अवसर पर फादर प्रवीण, सलीम राजा, फादर दयाकर, अशोक सिंह, राकेश वर्धन, अजय यादव आदि थे।

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