
संघर्ष निरंतर करता जा, करता जा, तू करता जा।
अन्धेरे से तू लड़ता जा, लड़ता जा, तू लड़ता जा।
गर मुश्किलें तुझे सताएंगी, हर परेशानी सामने आएगी,
खुद अपने वजूद को पहचानकर, पहचानकर,
अपने ईश्वरत्व को पहचानकर, पहचानकर,
खुद से तू अपनी राह बना, राह बना।
ऐ बंदे तू निरंतर संघर्ष करता जा, करता जा।
माना कभी हताश है तू, हताश है तू, हताश है तू।
कभी यूँ ही ख़ुद से नाराज है तू, नाराज है तू, नाराज है तू।
पर अंधेरों में भी प्रकाश छुपा है, वह तुझको पुकार रहा है,
ऐ बंदे तू मुझ तक आ, मुझ तक आ, मुझ तक आ।
संघर्ष निरंतर करता जा, करता जा, करता जा।
