वाराणसी। प्रेमचंद मार्गदर्शन केंद्र लमही की ओर से लमही में शुक्रवार को तीन दिवसीय प्रेमचंद उत्सव का समापन सवा सेर गेहूं’ का पाठ एवं काव्यगोष्ठी से समापन हुआ। अवसर वरिष्ठ कवयित्री डा मंजरी पाण्डेय ने प्रेमचंद की कालजयी कहानी ‘सवा सेर गेहूं’ का सजीव पाठ कियआ। अध्यक्षता प्रो. श्रद्धानंद व मुख्य अतिथि डा. हरिओम सिंह ने किया। डा. मंजरी पाण्डेय ने कहानी पाठ के दौरान प्रेमचंद की ग्रामीण यथार्थवाद की दृष्टि, बाल मनोविज्ञान की गहराई और सामाजिक तानेबाने की बुनावट को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया। इसके पश्चात सावन की सुगंध और मानसून की अनुभूतियों से परिपूर्ण काव्यगोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें विभिन्न कवियों और कवयित्रियों ने सावन पर आधारित रचनाएँ प्रस्तुत कर माहौल को रससिक्त कर दिया। कवयित्री डा. मंजरी पाण्डेय ने भी ‘बरखा बहार आई’, ‘घटाएं गरज रहीं’ जैसे गीतों से श्रोताओं को भावविभोर किया। बुद्ध देव तिवारी ने बाबा बैजनाथ को नाचते क्रिया पर खुब श्रोताओं को भाया, गौतम अरोमा सरस ने प्रेमचंद की जीवन पर दोहा प्रस्तुत किया। संगीता श्रीवास्तव ने कजरी की प्रस्तुति की। इस अवसर पर निदेशक राजीव गोंड ने प्रेमचंद उत्सव की सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि, लमही की धरती पर प्रेमचंद की रचनाओं का प्रत्यक्ष पाठ और साहित्यिक विमर्श इस आयोजन को जीवंतता प्रदान करता है। इस अवसर पर राकेश पाण्डेय, त्रप्ति जैन, अपूर्वा जैन, अभय जैन, सुंरेश दूबे, संगीत, बुद्ध देव तिवारी, गौतम अरोणा, राहुल यादव, राकेश कुमार, अरविंद थे। संचालन व धन्यवाद ज्ञापन मनोज विश्वकर्मा ने किया ।

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