कहानी पाठ से उभरी जीवन की अहम सच्चाईयां

 

वाराणसी। प्रेमचंद की प्रसिद्ध कहानी चकमा का पाठ रविवार को प्रेमचंद स्मारक स्थल लमही में समाजसेवी अजय यादव ने किया। वरिष्ठ साहित्यकार डॉ राम सुधार सिंह ने कहा प्रेमचंद की कहानी ‘चकमा’ केवल एक कहानी नहीं, बल्कि समाज का दर्पण है, जिसमें सामाजिक चेतना, नैतिक मूल्य और मानवीय रिश्तों का सूक्ष्म विश्लेषण किया गया है। इस कहानी में दिखाया गया है कि किस तरह एक व्यक्ति अपनी चालाकी और धोखाधड़ी के द्वारा दूसरों को नुकसान पहुंचाता है, लेकिन अंत में वही व्यक्ति खुद भी धोखा खा जाता है। यह कहानी समाज के उन पहलुओं को उजागर करती है, जो आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं। संरक्षक प्रो. श्रद्धानंद ने कहा कि “चकमा न केवल एक कहानी है, बल्कि समाज की गहराई में जाकर समस्याओं को उजागर करने का एक प्रयास है। यह जीवन की सच्चाईयों का प्रतिबिंब है, जिसमें प्रेमचंद ने अपने पात्रों के माध्यम से लालच, धोखा और आत्म-प्रवंचना की समस्या को प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत किया। कहानी पाठ का संचालन मनोज विश्वकर्मा ने किया । संरक्षक प्रो. श्रद्धानंद, वरिष्ठ साहित्यकार डा. राम सुधार सिंह, प्रकाश चन्द्र श्रीवास्तव और मनोज विश्वकर्मा ने सम्मान किया। यह कार्यक्रम न केवल साहित्यिक दृष्टि से महत्वपूर्ण था, बल्कि यह एक संदेश भी देता है कि प्रेमचंद की कहानियाँ न केवल साहित्य का हिस्सा हैं, बल्कि जीवन के भी अहम पाठ हैं। इस अवसर पर वरिष्ठ साहित्यकार डा. राम सुधार सिंह, राकेश वर्धन, राहुल यादव, प्रमोद मौर्य, रोहित गुप्ता, आलोक अस्थाना आदि थे।

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