वाराणसी।संस्कृत केवल एक भाषा नहीं है, बल्कि हमारी संस्कृति और सभ्यता की जड़ है। नई शिक्षा नीति में संस्कृत की उपयोगिता बढ़ गई है और अब हम लोगों का दायित्व है कि संस्कृत भाषा को जन-जन की भाषा बनाएं।उक्त विचार संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में संस्कृत सप्ताह कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए न्याय विभाग के वरिष्ठ आचार्य एवं संयोजक (संस्कृत सप्ताह) प्रो रामपूजन पांडेय ने व्यक्त किया।

उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम आज से दिनांक 11 अगस्त 2025 तक चलेगा।

प्रोफेसर राम पूजन पांडेय ने संस्कृत की व्यापकता और आवश्यकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह केवल एक भाषा नहीं है, बल्कि हमारी संस्कृति और सभ्यता की जड़ है। नई शिक्षा नीति में संस्कृत की उपयोगिता बढ़ गई है और अब हम लोगों का दायित्व है कि संस्कृत भाषा को जन-जन की भाषा बनाएं।

छात्रों ने संस्कृत संभाषण में भाग लिया और अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।

छात्रों ने श्लोकान्त्याक्षरी में भाग लिया और अपनी संस्कृत ज्ञान का प्रदर्शन किया।

संस्कृत भाषा की वर्तमान उपयोगिता का विस्तार से वर्णन किया और बताया कि कैसे संस्कृत को जन-जन की भाषा बनाया जा सकता है।

कुंज बिहारी द्विवेदी ने संस्कृत भाषा की महत्ता पर प्रकाश डाला और छात्रों को संस्कृत के प्रति प्रोत्साहित किया।

डॉक्टर बालेश्वर झा ने संस्कृत भाषा में अध्ययन और अध्यापन करने का संकल्प लिया और छात्रों को इसके लिए प्रेरित किया।

सह संयोजक डॉ रविशंकर पांडेय ने कहा कि विश्वविद्यालय ने सभी छात्रों से इस कार्यक्रम में भाग लेने की अपील की है। संस्कृत सप्ताह कार्यक्रम पूरे देश भर में आयोजित किया जा रहा है और विश्वविद्यालय इसे प्राथमिकता के साथ आयोजित कर रहा है। संस्कृत सप्ताह कार्यक्रम संस्कृति और शिक्षा का संगम है। यह कार्यक्रम छात्रों को संस्कृत की महत्ता और उपयोगिता के बारे में जागरूक करने के लिए आयोजित किया जा रहा है। हमें उम्मीद है कि यह कार्यक्रम सफल होगा और छात्रों को संस्कृत के प्रति प्रोत्साहित करेगा।

आयोजन में प्रो रामपूजन पांडेय,प्रो रविशंकर पांडेय, डॉ कुंजबिहारी द्विवेदी सहित अन्य आचार्य एवं विद्यार्थियों ने सहभाग किया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *