
आईएमएस बीएचयू और सर सुंदर लाल अस्पताल में विवादों के केंद्र और खासा चर्चा में रहने वाले आईएमएस डायरेक्टर प्रो एस.एन. शंखवार की मुश्किलें बढ़ सकती हैं, उनके खिलाफ गोरखपुर निवासी प्रदीप कुमार ने एक फिर से लोकायुक्त उत्तर प्रदेश के यहां जांच प्रक्रिया तेज करने के लिए शिकायत की है। केजीएमयू में चिकित्सा अधीक्षक रहने के दौरान 2004- 2005 में समूह ‘ग’ की नियुक्तियों में व्यापक पैमाने पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे, आजमगढ़ अतरौलिया पूर्व विधायक सुरेन्द्र प्रसाद मिश्र की शिकायत का संज्ञान लेते हुए सन 2018 में उत्तर प्रदेश शासन द्वारा जांच बैठाई गई, जिसमें केजीएमयू के तत्कालीन चिकित्सा अधीक्षक और कई कर्मचारियों की धांधली और भ्रष्टाचार मामले में संलिप्तता उजगार हुई। इस मामले में 2021 में लखनऊ निवासी सचिन कुमार द्विवेदी द्वारा इस मामले में लोकायुक्त के समक्ष परिवाद प्रस्तुत किया गया है। इस मामले में 2021 से लेकर अब तक लोकायुक्त की जांच अभी लंबित है।
बीएचयू के कई कर्मचारी और अधिकारी नाम न बताने की शर्त पर बताते हैं कि सिटी स्कैन और एमआरआई टेंडर घोटाले में भी प्रो शंखवार की भूमिका पर बड़े सवाल खड़े होते हैं, फर्जी जीएसटी नंबर के माध्यम से टेंडर अपने चहेतों को देने की बहुत कोशिश की, लेकिन न्यायालय के आदेश के बाद टेंडर प्रक्रिया रद्द हुई और आरोपियों के खिलाफ मुकदमा पंजीकृत हुआ।
केजीएमयू नियुक्ति घोटाला और भ्रष्टाचार प्रकरण एक फिर से शिकायत होने के बाद प्रो एसएन शंखवार की मुश्किलें बढ़ सकती है। भ्रष्टाचार को लेकर मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश योगी आदित्यनाथ की नीति जीरो टॉलरेंस की है, मामला अगर मुख्यमंत्री के समक्ष पहुंचता है तो प्रो एसएन शंखवार की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
