
राखी
लेइके रक्षा बंधन के दिन आव बहन,
का लेबू बताव बहन ना II
एक बजे तक शुभ दिन बाहइ,
पंडित जी अइसन बतलावइं I
मिठाई,रोली- दीप थाल में सजाव बहन, का लेबू बताव बहन ना II1II
नथिया झुमका हाथ के कंगना,
जयपुरिया चूनर और लहँगा I
हीरा,मोती साड़ी में लगल लगावल बहन,
का लेबू बताव बहन ना II2II
रक्षा बंधन के बड़ त्यौहार,
भाई – बहन के सुंदर प्यार I
कलाई पर बंधल राखी दुख से बचावइ बहन,
का लेबू बताव बहन ना II3II
भाभी भी घर द्वार सजावइं,
नंनद जी कब हमरे घर आवइं I
मेंहदी पीसि – पीसि डिजाइन सजावइं बहन,
का लेबू बताव बहन ना II4II
जब तक सूरज- चाँद चमकिहैं
रक्षा में भइया मर मिटिहैं I
“नरेश” के याद द्रोपदी के जस दिलाय बहन,
का लेबू बताव बहन ना II5II
राखी लेइके रक्षा बंधन के दिन आव बहन,
का लेबू बताव बहन ना II
कवि इंजी. राम नरेश “नरेश”
वाराणसी
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