वाराणसी । नादान परिंदे साहित्य मंच एवं ध्येय आई ए एस के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित सावन कजरी महोत्सव – 2025 का आयोजन दुर्गाकुंड स्थित श्री हनुमान प्रसाद पोद्दार अंध विद्यालय के सभागार में सम्पन्न हुआ । साथ ही समाजसेवा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले 125 विशिष्ट जनो को रुद्राक्ष की माला, अंगवस्त्रम व स्मृति चिन्ह देकर कजरी स्त्न सम्मान-2025 से सम्मानित किया गया।

सर्वप्रथम सरस्वती वंदना के साथ संस्था के अध्यक्ष वरिष्ठ समाजसेवी डॉ सुबाष चन्द्र ने मुख्य अतिथि व विशिष्ठ अतिथियों के साथ दीप प्रज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।

इस अवसर पर डॉ सुबाष चन्द्र ने कहा कि पहले गांव की महिलाएं सावन मास का इंतजार करती थीं, वे सहेलियां के साथ समूह बनाकर झूला झूलने जाती थी उसके बाद सामूहिक कजरी गीत गाती थी । लेकिन समय के साथ धीरे धीरे पश्चिमी सभ्यता एवं आधुनिकरण के प्रभाव से अब सावन में पड़‌ने वाली बरसात के पानी के फुहारों के साथ ही झूले और झूले पर गाए जाने वाली कजरी गीत भी विलुप्त होने के कगार पर पहुंच चुकी है। इसी उद्देश्य से नादान परिंदे साहित्य मंच विगत वर्षों से सावन कजरी महोत्सव का आयोजन करती आ रही है।

समारोह के मुख्य अतिथि

प्रवीण प्रकाश – Ex. IAS, विशिष्ट अतिथि विनय सिंह – संस्थापक ध्येय IAS, अध्यक्षता हीरालाल मिश्र मधुकर ने किया।

समारोह में संरक्षक – संरक्षक प्रकाश कुमार श्रीवास्तव गणेश जी, कोषाध्यक्ष – झरना मुखर्जी, दीपक सिंह – ध्येय IAS, वाराणसी कार्यक्रम संयोजक अंशुमान राय, धैर्य वर्धन सिंह, डा. ओ.पी. प्रजापति, सुधीर सिंह, अशोक पांडेय, संतोष अग्रवाल, अटल खत्री, महेन्द्र विश्वकर्मा, सुधांशु पाल ,आदित्य जायसवाल, संजय कुमार गुप्ता, प्रो. अरविन्द कुमार जोशी, कर्नल गोविन्द सिंह, कुशाल दास गुप्ता, श्रीकान्त पाण्डेय, गोपाल केजरीवाल, लक्ष्मी पाठक, हरदत्त शुक्ला, सरोज वर्मा, आनन्द राय ,डा कैलाश सिंह विकास, मुकेश पांडेय, सुधीर त्रिपाठी, काली शंकर उपाध्याय का विशेष योगदान रहा।

समारोह में अमित श्रीवास्तव व संदीप मौर्या ने नृत्य नाटिका प्रस्तुत किया, तत्पश्चात् परमहंस तिवारी परम, महेंद्र अलंकार, पूनम श्रीवास्तव, आनंद कृष्ण मासूम, मधुलिका राय, सिद्धनाथ शर्मा ” सिद्ध जी”, झरना मुखर्जी, बीना राय, करुणा सिंह, नसीमा निशा, मणि बेन द्विवेदी आदि लोगों ने कजरी गायन प्रस्तुत कर दर्शकों को आत्मविभोर कर दिया।

मंच संचालन डॉ शरद श्रीवास्तव ” शरद” और धन्यवाद ज्ञापन गिरीश पाण्डेय ” काशिकेय ” ने किया।

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