वाराणसी। प्रेमचंद की कहानियाँ हमेशा अपने यथार्थवादी दृष्टिकोण और समाज की सच्चाइयों को उजागर करने के लिए प्रसिद्ध रही हैं। ऐसे ही एक अवसर पर प्रेमचंद मार्गदर्शन केंद्र ने प्रेमचंद स्मारक स्थल लमही में सुनों मैं प्रेमचंद कहानी पाठ के 1637वें दिवस का आयोजन किया। इस अवसर पर फिल्म निर्देशक विवेक त्रिपाठी ने प्रेमचंद की प्रसिद्ध कहानी “तगादा” का पाठ किया। प्रो. श्रद्धानंद कहा कि “तगादा” कहानी प्रेमचंद की यथार्थवादी कहानी कला का उत्कृष्ट उदाहरण है। उन्होंने इसे केवल कर्ज़ और वसूली की कथा न मानते हुए इसे दो मनुष्यों के बीच आर्थिक मजबूरी, मानवीय संवेदना और सामाजिक ढाँचे के टकराव का प्रतीक बताया। यह कहानी पाठकों को यह सोचने पर मजबूर करती है कि समाज में आर्थिक न्याय और मानवीयता को कैसे संतुलित किया जाए। निदेशक राजीव गोंड और डॉ. हरिओम सिंह ने साहित्यिक आयोजन की महत्ता को रेखांकित किया। इस दौरान आशुतोष तिवारी, वैभव शर्मा, डीबी सिंह, रोहित गुप्ता, अश्वित दूबे, राहुल यादव, विपनेश सिंह,प्रांजल आदि थे। संचालन आयुषी दूबे, राजेश श्रीवास्तव और स्वागत मनोज विश्वकर्मा, धन्यवाद ज्ञापन आलोक शिवाजी ने धनयवाद ज्ञापन किया।

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