
आधुनिक सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के शिल्पी थे डा एएन झा
वाराणसी। मैथिल समाज, उत्तर प्रदेश और समपूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित समपूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय के प्रथम कुलपति पद्मविभूषण डा आदित्यनाथ झा कि 114 वीं जयंती समारोह प्रो.सम्पूरर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय के योग साधना केंद्र में प्रो राम रामपूजन पाण्डेय की अध्यक्षता में समपन्न।
सर्वप्रथम मुख्य अतिथि प्रो संजय पासवान एमएलसी,प्रो रजनीश शुक्ला,प्रो राम रामपूजन पाण्डेय और आगत अतिथियों ने डा आदित्यनाथ झा के चित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्ज्वलित करके समारोह का शुभारंभ किया|
मुख्य अतिथि प्रो संजय पासवान और अन्य अतिथियों को मैथिल समाज, उत्तर प्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष निरसन कुमार झा एडवोकेट ने मिथिला संस्कृति के प्रतीक पाग, दुपट्टा और माला पहनाकर सम्मानित किया|
मुख्य अतिथि पद से बोलते हुए प्रो संजय पासवान ने कहा कि मिथिला और कशी के प्राचीन और प्रगाढ़ सम्बन्ध को देखते हुए मिथिला काशी कोरिडोर समय की मांग है|कोरिडोर के माध्यम से बौध्दिकता का आदान प्रदान होगा जिससे की मिथिला और काशी के लोग एक दूसरे के और नजदीक आयेंगे| सर गंगानाथ झा के चार बेटों डा एएन झा सबसे छोटे थे, तभी इनकी माँ ने कल्पना कर लिया था कि मेरा बेटा बड़ा होकर कलेक्टर बनेगा जो कि सत्य साबित हुआ।
डा झा में प्रशासनिक दक्षता कमाल कि थी, इसीलिए तत्कालीन मुख्यमंत्री समपूर्णान्द समपूर्णानन्द ने उन्हें विश्वविद्यालय का कुलपति बनायोडा एएन झा के भगीरथ प्रयास का ही कमाल था कि विश्वविद्यालय आज ऐसे आधुनिक स्वरूप में है, सही मायने में आधुनिक समपूर्णानन्द संस्कृत के शिल्पी थे डा एएन झा|
मुख्य वक्ता प्रो रजनीश शुक्ला ने कहा की आदित्यनाथ झा के जीवन में प्रथम शब्द का महत्वपूर्ण स्थान था, डा झा दिल्ली के प्रथम उपराज्यपाल, तत्कालीन भारतीय प्रशासनिक सेवा आईसीएस में समपूर्ण भारत में प्रथम स्थान प्राप्त किया, सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के प्रथम कुलपति, भारतीय प्रशासनिक अकादमी, देहरादून के प्रथम डाइरेक्टर थे,और भी जीवन में बहुत से ऐसे क्षेत्र थे, जहाँ डा आदित्यनाथ झा ने प्रथम स्थान प्राप्त किया था।
समारोह की अध्यक्षता करते हुए प्रभारी कुलपति प्रो रामपूजन पाण्डेय ने कहा कि पद्मविभूषण डा आदित्यनाथ झा ने प्रशासनिक दक्षता के अलावा अन्य क्षेत्रों में भी महारत हासिल किया था, डा एएन झा कई भाषाओं के अच्छे विद्धान थे हिन्दी, अंग्रेजी, संस्कृत और मैथिली के प्रखाण्ड विद्धान थे, इन सभी भाषाओं पर इन्हें महारत हासिल था, विश्वविद्यालय के छात्रों को डा झा साहब के जीवन से सीख लेकर आगे बढ़ना चाहिए, तभी डा झा का सपना साकार होगा।
मंचस्थ अतिथियों के द्वारा
“गोविंदायन”श्रीमद्भगवद्गीताक मैथिली-पद्यानुवाद का लोकार्पण भी किया गया।
कार्यक्रम का संयोजन तुलनात्मक धर्म दर्शन विभाग के अध्यक्ष प्रो रजनीश शुक्ला ने तथा सह संयोजन/संचालन गौतम कुमार झा,(एडवोकेट) ने किया, विषय स्थापना डा कमलेश झा ने स्वागत संस्था के अध्यक्ष निरसन कुमार झा (एडवोकेट) ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन प्रो शैलेश मिश्रा ने किया।
कार्यक्रम में प्रमुख रूप से प्रो शंकर मिश्र,प्रो सुधाकर मिश्रा,प्रो विजय पाण्डेय,,प्रो जितेंद्र शाही,डा पीके झा डा अत्रि भारद्वाज,हरिमोहन पाठक, नटवर झा, सुधीर चौधरी,बनारस बार के महामंत्री शशांक श्रीवास्तव, दीपक राय कान्हा, ओम् शंकर श्रीवास्तव,प्रेम प्रकाश गौतम,आदि लोग शामिल थे।
