अन्तर विश्वविद्यालय अध्यापक शिक्षा केन्द्र के पांच दिवसीय कार्यशाला में दूसरा दिन 

वाराणसी।अन्तर विश्वविद्यालय अध्यापक शिक्षा केन्द्र, बीएचयू, वाराणसी व सूचना एवं पुस्तकालय नेटवर्क केन्द्र, गांधी नगर, गुजरात के संयुक्त तत्वावधान में “रिसर्च एथिक्स एंड एकेडेमिक इंटीग्रिटी: लीवरेजिंग डिजिटल टूल्स” विषय पर पांच दिवसीय लघु अवधि प्रशिक्षण कार्यक्रम के दूसरे दिन की शुरुआत श्री मनोज कुमार के., सूचना एवं पुस्तकालय नेटवर्क केंद्र, गांधीनगर, अहमदाबाद के “शैक्षणिक ईमानदारी और शोध में अनैतिक आचरण” विषय पर व्याख्यान से हुई।

उन्होंने शोध में डेटा की हेराफेरी, फेब्रिकेशन और फॉल्सिफिकेशन जैसे गंभीर मुद्दों पर प्रकाश डाला साथ ही, शोधकर्ताओं के लिए एआई आधारित डिजिटल टूल्स के प्रभावी उपयोग पर भी जानकारी प्रदान की।

द्वितीय वक्ता डॉ. विजयकुमार एम., पुस्तकालयाध्यक्ष, पांडिचेरी विश्वविद्यालय ने “एआई अनुप्रयोग द्वारा शोध प्रक्रिया में तेजी” विषय पर विचार साझा किए। उन्होंने बताया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता शोधकर्ताओं को डेटा विश्लेषण, साहित्य समीक्षा और संदर्भ प्रबंधन में सहायता प्रदान कर सकती है। इस सत्र में एआई टूल्स के व्यावहारिक उपयोग और शोध गुणवत्ता में उनके योगदान पर विशेष बल दिया गया।

तृतीय वक्ता डॉ. पी. ओंकार, महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय, मोतिहारी ने “शैक्षणिक लेखन की समझ” विषय पर सारगर्भित व्याख्यान दिया।

उन्होंने अकादमिक लेखन की संरचना, शैली और शोध संदर्भों की महत्ता पर विस्तार से चर्चा की।

आज की चतुर्थ वक्ता डॉ. कुशाग्री सिंह, आईयूसीटीई, बीएचयू, वाराणसी ने संदर्भ प्रबंधन उपकरणों (मेंडेली, जोटेरो, एंडनोट, रेफवर्क्स) की उपयोगिता पर जानकारी दी। उन्होंने शोध लेखन में इन डिजिटल टूल्स के माध्यम से स्रोतों के सुव्यवस्थित संकलन और उद्धरण प्रबंधन की प्रक्रिया को सरल बनाने पर बल दिया। आज के अंतिम वक्ता श्री राजन कुमार, सूचना एवं पुस्तकालय नेटवर्क केन्द्र ने “लेखक की अकादमिक पहचान और ऑर्किड” विषय पर शोध नैतिकता बढ़ाने के उपायों पर प्रकाश डाला।

उन्होंने शोधगंगा के साथ ऑर्किड एकीकरण की प्रक्रिया और वैश्विक शोध नेटवर्क से जुड़ने की संभावनाओं पर चर्चा की।

इस पांच दिवसीय लघु अवधि प्रशिक्षण कार्यक्रम में बिहार, दिल्ली, गुजरात, झारखंड, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश सहित 11 राज्यों से 48 प्रतिभागी प्रतिभाग कर रहे हैं। कार्यक्रम का सह-समन्वयन डॉ. चक्रधर राणा व श्री मनोज कुमार के. कर रहे हैं।

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